कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड में साइबर ठगी के केंद्रों पर कार्रवाई के बाद हजारों पीड़ित घर लौटने के लिए संघर्षरत; ओवरस्टे जुर्माना और सीमित सहायता ने बढ़ाई मुश्किल

Scam Compound से बाहर आए तो नया संकट खड़ा: वीजा, पासपोर्ट और पैसे के बिना हजारों लोग फंसे

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के बाद हजारों लोगों को Scam Compounds से बाहर तो निकाला गया, लेकिन उनके लिए राहत की जगह एक नया संकट खड़ा हो गया है। कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड में बड़े पैमाने पर छापेमारी के बाद बचाए गए कई लोग अब बिना पासपोर्ट, पैसे और वैध वीजा के फंसे हुए हैं। मानव तस्करी विरोधी संगठनों के मुताबिक, इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के हजारों लोग शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी के नेटवर्क में पहुंचाया गया था।

कंबोडिया में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है। कई पीड़ित राजधानी Phnom Penh पहुंच गए हैं और कुछ सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। उनके पास भोजन, रहने और घर लौटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को Immigration Detention Centres में रखा गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक पूर्व Scam Compound को ही Detention Centre में बदल दिया गया है, जहां उन लोगों को रखा जा रहा है जिन्हें कभी ऐसे केंद्रों से निकालकर बचाया गया था।

मानव तस्करी विरोधी संगठनों का कहना है कि कई पीड़ितों के वीजा की अवधि उस समय समाप्त हो गई जब वे Scam Compounds में जबरन काम कर रहे थे। अब उनके ऊपर हजारों डॉलर का Overstay Fine जमा हो गया है। रकम चुकाने में असमर्थ लोग देश छोड़ने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। सहायता संगठनों के पास भी सीमित संसाधन बचे हैं, जिससे प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित आवास, कानूनी मदद और घर वापसी की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।

लाइबेरिया के 27 वर्षीय Emmanuel को कंबोडिया में Graphic Designer की नौकरी का प्रस्ताव देकर बुलाया गया था। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उसका पासपोर्ट और फोन जब्त कर लिया गया और उसे जंगल में स्थित एक Scam Compound में ले जाया गया। वहां उसे अमेरिका और यूरोप के लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने के लिए मजबूर किया गया। काम से इनकार करने पर कथित तौर पर उसे एक कमरे में बंद किया गया, पीटा गया और Electric Batons से झटके दिए गए। करीब एक साल बाद पुलिस कार्रवाई के दौरान वह लगभग 400 अन्य लोगों के साथ बाहर निकल सका।

हालांकि, Compound से निकलने के बाद भी उसकी परेशानी खत्म नहीं हुई। उसके पास न पैसा था, न रहने की जगह और न ही वैध वीजा। परिवार ने किसी तरह उसके लिए घर लौटने का टिकट खरीदा, लेकिन एयरपोर्ट पर कथित तौर पर उसे बताया गया कि पहले Overstay Fee का भुगतान करना होगा। उसके मुताबिक, यह रकम करीब $4,000 थी। इस वजह से वह दोबारा देश से बाहर निकलने में असमर्थ हो गया।

मानव तस्करी विरोधी संगठनों का आरोप है कि Scam Compounds से निकलने वाले लोगों को कई बार पीड़ित के बजाय अपराधी की तरह देखा जा रहा है। Amnesty International ने जून में जिन 73 बचे लोगों का आकलन किया, उसके मुताबिक किसी को भी आधिकारिक तौर पर Human Trafficking Victim के रूप में मान्यता नहीं मिली थी, जबकि संगठन के आकलन में सभी लोग तस्करी की परिभाषा के दायरे में आते थे। विशेषज्ञों के अनुसार, पीड़ित के रूप में पहचान नहीं मिलने से उन्हें Emergency Accommodation, Legal Assistance और Repatriation Programmes जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

सड़क पर रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा का खतरा भी बढ़ गया है। सहायता संगठनों के मुताबिक, कुछ महिलाओं ने खुले में रहने के दौरान Sexual Abuse की घटनाओं की शिकायत की है। इसके अलावा, उन लोगों के दोबारा Scam Networks में पहुंचने का खतरा बढ़ रहा है जो देश छोड़ने में असमर्थ हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आपराधिक नेटवर्क इस मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।

इथियोपिया के 34 वर्षीय IT Graduate Matthew भी ऐसे ही पीड़ितों में शामिल हैं। उसे कंबोडिया में Hardware और Software Maintenance की नौकरी का प्रस्ताव मिला था, जिसमें अच्छी सैलरी, रहने की सुविधा, भोजन और वीजा का वादा किया गया था। Phnom Penh पहुंचने के बाद उसे कथित तौर पर वियतनाम सीमा के पास एक बड़े Compound में ले जाया गया। वहां पहुंचने पर उसका पासपोर्ट और फोन ले लिया गया और उसे Cryptocurrency Investment Scams चलाने के लिए मजबूर किया गया।

Matthew के मुताबिक, कर्मचारियों को तय लक्ष्य पूरा करने के लिए दबाव में रखा जाता था। लक्ष्य पूरा नहीं करने पर कथित तौर पर मारपीट, जुर्माना और सार्वजनिक अपमान किया जाता था। कुछ गंभीर मामलों में Electric Shocks देने का भी आरोप है। कुछ महीनों बाद Matthew को दूसरे Compound में कथित तौर पर भेज दिया गया।

जब कंबोडियाई अधिकारियों ने Scam Compounds पर कार्रवाई शुरू की तो Matthew और अन्य लोगों को वहां से निकलने का मौका मिला। लेकिन बाहर आने के बाद उसके सामने वही समस्या खड़ी थी—न पैसा, न वैध वीजा और न घर लौटने का स्पष्ट रास्ता। कंबोडिया में इथियोपिया का स्थायी दूतावास नहीं होने के कारण उसे दूसरे देश में स्थित अपने दूतावास से सहायता मांगनी पड़ी। उसके मुताबिक, मदद के लिए किए गए कई अनुरोधों का जवाब नहीं मिला और उसे दूसरे लोगों की मदद से गुजारा करना पड़ा।

मानव तस्करी विशेषज्ञों का कहना है कि Scam Compounds के खिलाफ केवल छापेमारी और गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। बचाए गए लोगों की पहचान Human Trafficking Victims के रूप में करना, उनके दस्तावेज वापस दिलाना, कानूनी सहायता उपलब्ध कराना और सुरक्षित Repatriation सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो देश छोड़ने में असमर्थ पीड़ित दोबारा उन्हीं आपराधिक नेटवर्क के निशाने पर आ सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई आपराधिक गिरोह पुराने Scam Compounds को दोबारा सक्रिय कर रहे हैं और नए स्थानों पर भी नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। कंबोडिया में ऐसे लोगों को दोबारा भर्ती किए जाने की आशंका बढ़ गई है जो सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। उनके पास न पैसे हैं और न रोजगार के विकल्प, इसलिए अपराधी गिरोह उन्हें आसानी से फिर अपने जाल में फंसा सकते हैं।

कंबोडियाई अधिकारियों ने पहले कहा है कि उन्होंने बड़ी संख्या में Scam Workers और Human Trafficking Victims को बचाया तथा कानून के अनुसार उन्हें उनके देशों में वापस भेजा। हालांकि, सहायता संगठनों का कहना है कि जमीन पर अब भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। ऐसे में Scam Compound से बाहर निकलना इन पीड़ितों के लिए अंत नहीं, बल्कि एक नई चुनौती की शुरुआत बन गया है—जहां साइबर गुलामी से आजाद होने के बाद भी घर लौटने का रास्ता आसान नहीं है।

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