पुणे के दो फर्जी कॉल सेंटर से अभिभावकों को IIT और नामी संस्थानों में दाखिले का झांसा; ₹16.50 लाख की ठगी की शिकायत, ₹1.35 करोड़ की संपत्ति जब्त

फर्जी कॉलेज एडमिशन के नाम पर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 10 गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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मुंबई: प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों का दाखिला कराने के नाम पर अभिभावकों से लाखों रुपये की कथित ठगी करने वाले गिरोह का मुंबई पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने महाराष्ट्र के पुणे में संचालित दो फर्जी कॉल सेंटरों पर कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर मुंबई समेत महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में कम से कम छह मामलों से जुड़े होने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अभिभावकों से लंबे समय तक बातचीत कर उनका भरोसा जीतते थे और फिर एडमिशन, डिपॉजिट, एडवांस तथा फीस के नाम पर लगातार रकम वसूलते थे।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब ₹1.35 करोड़ मूल्य की संपत्ति जब्त की है। इसमें कथित तौर पर ठगी की रकम से जुड़ी तीन कारें और एक बैंक खाते में जमा ₹24 लाख शामिल हैं। जब्त वाहनों में BMW, Jaguar और Maruti Suzuki Ciaz शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि ये वाहन मुख्य आरोपी के इस्तेमाल में थे, लेकिन इनके पंजीकरण दूसरे लोगों के नाम पर कराए गए थे।

Instagram विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क

मामला तब सामने आया जब मुंबई निवासी 47 वर्षीय एक महिला ने Instagram पर ‘techorbit1111’ नाम के पेज पर विज्ञापन देखा। इसके बाद वह आरोपियों के संपर्क में आई। आरोपियों ने दावा किया कि वे उनके बेटे का IIT Hyderabad में NRI या मैनेजमेंट कोटे के जरिए दाखिला करा सकते हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने महिला को IIT Hyderabad परिसर भी ले जाकर यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि संस्थान में उनके प्रभावशाली संपर्क हैं और वे दाखिला सुनिश्चित करा सकते हैं। इसके बाद अलग-अलग मौकों पर ₹2 लाख से ₹3 लाख की रकम डिपॉजिट, एडवांस और पहले वर्ष की फीस के नाम पर मांगी गई।

महिला से कथित तौर पर कुल ₹16.50 लाख लेने के कुछ दिन बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया। मामला दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने संबंधित बैंक से संपर्क कर ठगी की रकम को फ्रीज कराया।

पुणे में दो कॉल सेंटरों पर छापा

जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के पुणे के लोहेगांव और खराड़ी स्थित दो कथित कॉल सेंटरों के बारे में जानकारी मिली। 14 अगस्त को दोनों ठिकानों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के पास से 22 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, दो हार्ड डिस्क, दो लैपटॉप, अलग-अलग बैंकों के सात डेबिट कार्ड और शैक्षणिक संस्थानों के नाम तथा मोबाइल नंबरों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए। बरामद सामग्री में करीब 30 मोबाइल नंबरों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के नाम वाली सूची भी शामिल है। इसमें Pune Institute of Computer Technology, Netaji Subhas University of Technology और Delhi Technological University जैसे संस्थानों के नाम पाए गए।

2019 से चल रहा था कथित नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी कथित तौर पर 2019 से लोहेगांव से एडमिशन रैकेट चला रहा था। वर्ष 2024 से उसने अन्य लोगों को भी इस नेटवर्क में शामिल करना शुरू किया। गिरफ्तार 10 आरोपियों में पांच B.Tech स्नातक हैं, जबकि बाकी आरोपियों का भी इंजीनियरिंग से जुड़ा शैक्षणिक या तकनीकी बैकग्राउंड बताया गया है।

पुलिस का कहना है कि तकनीकी और एडमिशन प्रक्रिया की जानकारी होने के कारण आरोपी अभिभावकों से संस्थानों, कोटा, फीस और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करते थे। इस तरह वे खुद को वास्तविक एडमिशन कंसल्टेंट या प्रभावशाली संपर्क वाला व्यक्ति साबित करने की कोशिश करते थे।

छह मामलों से जुड़ी जांच

पुलिस ने अब तक गिरोह को छह मामलों से जोड़कर जांच शुरू की है। इनमें मुंबई, नागपुर, कर्नाटक और गुजरात में एक-एक तथा उत्तर प्रदेश में दो मामले शामिल हैं। गिरफ्तार मुख्य आरोपी को 15 अगस्त को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 20 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया।

पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने कितने अभिभावकों को निशाना बनाया और कथित ठगी की कुल रकम कितनी है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद संस्थानों और मोबाइल नंबरों की सूची से नेटवर्क का दायरा और बढ़ने की संभावना है। जांच के आधार पर अन्य आरोपियों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

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