व्यापारियों से नकद मंडी शुल्क वसूलकर पोर्टल पर घटाई जाती रही बकाया राशि; पूर्व लिपिक ने ₹75.99 लाख लौटाए, ₹15.25 लाख की देनदारी अब भी बाकी

रिटायरमेंट के बाद खुला ₹76 लाख के गबन का राज, मंडी सचिव और निरीक्षक निलंबित

Roopa
By Roopa
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बुलंदशहर: अनूपशहर कृषि उत्पादन मंडी समिति में सेवानिवृत्त लिपिक के कार्यकाल से जुड़ा ₹76 लाख से अधिक का कथित वित्तीय गबन सामने आने के बाद शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी मंडी सचिव और मंडी निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि आउटसोर्सिंग पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। मामला उस समय सामने आया जब संबंधित लिपिक के रिटायर होने के बाद व्यापारियों के पोर्टल पर बकाया राशि में गड़बड़ी दिखाई देने लगी और शिकायतें बढ़ने लगीं।

मामले की जड़ मंडी समिति के सेवानिवृत्त लिपिक से जुड़ी बताई जा रही है, जो 30 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। आरोप है कि उन्होंने रिटायरमेंट के समय न तो नो-ड्यूज प्रमाण पत्र लिया और न ही अपना पूरा चार्ज सौंपा। इसके बाद मंडी प्रशासन ने रिकॉर्ड की जांच शुरू की तो कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।

2018 की रसीद बुक का वर्षों तक इस्तेमाल

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपी लिपिक ने वर्ष 2018 में जारी रोकड़ रसीद बुक का कथित तौर पर 2022 से 2025 तक बिना अनुमति इस्तेमाल किया। आरोप है कि इस दौरान व्यापारियों से मंडी शुल्क, विकास सेस और किराए के रूप में बड़ी रकम नकद वसूली गई।

शिकायत में कहा गया है कि व्यापारियों से वसूली गई रकम को सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय मंडी के ऑनलाइन पोर्टल पर बकाया डिमांड को कथित तौर पर फर्जी तरीके से कम कर दिया जाता था। इस तरीके से सरकारी रिकॉर्ड में देनदारी कम दिखाई जाती रही, जबकि वास्तविक रूप से वसूली गई रकम का पूरा हिसाब सरकारी खाते में नहीं पहुंचा।

रसीदों में भी हेराफेरी का आरोप

जांच में रसीद बुक के इस्तेमाल में एक और अनियमितता सामने आने का दावा किया गया है। आरोप है कि रसीद की ऊपरी प्रति खाली छोड़कर नीचे लगी कार्बन कॉपी में कम राशि दर्ज की जाती थी। इस प्रक्रिया के जरिए ₹13,410 की अतिरिक्त हेराफेरी किए जाने की बात जांच में सामने आई है।

जांच का शिकंजा कसने और कार्रवाई की आशंका के बीच सेवानिवृत्त लिपिक ने कथित गबन की मूल राशि ₹75,99,350 किस्तों में बैंक खाते में जमा करा दी। हालांकि, इस राशि पर निर्धारित ब्याज ₹15,12,240 और ₹13,410 की अलग हेराफेरी की रकम जमा नहीं की गई।

इस तरह कुल ₹15,25,650 की राशि अब भी बकाया बताई जा रही है। इसके बाद मंडी प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अनूपशहर कोतवाली में सेवानिवृत्त लिपिक के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।

जांच के बाद कर्मचारियों पर भी कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडी विभाग के स्तर से तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने रिकॉर्ड, पोर्टल पर दर्ज डिमांड, रसीद बुक और वित्तीय लेनदेन की जांच की। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने प्रभारी मंडी सचिव और मंडी निरीक्षक को निलंबित करने का आदेश दिया।

इसके अलावा आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पोर्टल से जुड़े रिकॉर्ड और डिमांड में कथित बदलावों के संदर्भ में जांच के दायरे में आई थी।

व्यापारियों से वसूली और सरकारी रिकॉर्ड की जांच

अब पुलिस और विभागीय स्तर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित गड़बड़ी कितने व्यापारियों के मामलों में हुई और कुल कितनी रकम प्रभावित हुई। नकद वसूली से संबंधित रसीदों, बैंक रिकॉर्ड, मंडी पोर्टल पर दर्ज डिमांड और पुराने अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है।

मामले की जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि लंबे समय तक कथित वित्तीय अनियमितता कैसे चलती रही और रिकॉर्ड में बदलाव करने में किन लोगों की भूमिका रही। विभागीय कार्रवाई के साथ दर्ज मुकदमे में भी आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जा सकती है।

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