अहमदाबाद: अहमदाबाद पुलिस ने कथित ‘बॉस स्कैम’ से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान और चीन से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के खिलाफ देश के 26 राज्यों में अब तक 251 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। मामले में पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि विदेशी ऑपरेटरों, स्थानीय सहयोगियों और साइबर ठगी में इस्तेमाल वित्तीय नेटवर्क की जांच जारी है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिछले चार से पांच वर्षों से कथित तौर पर साइबर अपराधियों को तकनीकी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा रहे थे। इसमें सिम कार्ड, मोबाइल डिवाइस और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जैसी सुविधाएं शामिल थीं। जांच के दौरान करीब 10,000 मोबाइल फोन और लैपटॉप इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए, जिन्हें पुलिस ने निष्क्रिय करा दिया है।
विदेश बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाए सिम कार्ड
जांच में सामने आया कि नेटवर्क से जुड़े लोग बड़ी संख्या में सिम कार्ड हासिल कर उन्हें विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे। पुलिस ने करीब 4,500 सिम कार्ड की खरीद का पता लगाया है, जिनका कथित तौर पर साइबर ठगी में इस्तेमाल किया जाना था।
छापेमारी के दौरान ऐसे उपकरण भी मिले, जिनमें एक साथ कई सिम कार्ड चलाए जा सकते थे। पुलिस के अनुसार, यह इंफ्रास्ट्रक्चर कथित तौर पर इस्लामाबाद से संचालित कॉल सेंटरों से जुड़ा था। जांच में चीनी मैलवेयर के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस का आरोप है कि इसी व्यवस्था के जरिए विदेशों में बैठे अपराधी पीड़ितों से संपर्क करते, संदिग्ध लिंक भेजते और अवैध तरीके से रकम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि सिम कार्ड किसके नाम पर लिए गए, उन्हें किसने सक्रिय कराया और उनसे जुड़े खातों का नियंत्रण किसके पास था।
21 हजार OTP उपलब्ध कराने का आरोप
इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कथित तौर पर OTP उपलब्ध कराने से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अब तक करीब 21,000 OTP साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए और प्रत्येक OTP के लिए लगभग ₹100 तक शुल्क लिया।
जांचकर्ताओं का कहना है कि गिरोह ने शुरुआत में Telegram समूहों का इस्तेमाल किया, लेकिन बाद में निगरानी से बचने के लिए WhatsApp समूहों पर गतिविधियां स्थानांतरित कर दीं। OTP की इतनी बड़ी संख्या से संकेत मिलता है कि नेटवर्क अलग-अलग साइबर ठगी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा था।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इसी इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल अलग-अलग तरह की ऑनलाइन ठगी में किया गया या नहीं और पीड़ितों की जानकारी जुटाने तथा साझा करने में कितने अन्य लोग शामिल थे।
26 राज्यों में 251 शिकायतें
जांच का दायरा उस समय बढ़ गया जब पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़ी 26 राज्यों की 251 शिकायतों की जानकारी मिली। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये सभी मामले एक ही संगठित नेटवर्क से जुड़े हैं या अलग-अलग साइबर गिरोह समान इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर रहे थे।
पश्चिम बंगाल में कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड से जुड़े उपकरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। पुलिस इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर संचार माध्यमों, फोन नंबरों, वित्तीय लेनदेन और विदेशी ऑपरेटरों से संबंधों का पता लगा रही है।
विशेषज्ञ ने सतर्क रहने की दी सलाह
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, ऐसे नेटवर्क में साइबर अपराध की पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग स्तरों में बांट दिया जाता है। कोई व्यक्ति सिम कार्ड और OTP उपलब्ध कराता है, तो कोई डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर या मैलवेयर के जरिए आगे की कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर और दूर बैठे ऑपरेटरों के संयोजन से ऐसे अपराधों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी अनजान व्यक्ति से प्राप्त फाइल या लिंक को बिना सत्यापन के न खोलें। खासकर बैंकिंग, नौकरी, निवेश या कारोबारी भुगतान से जुड़े लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि जरूरी है।
पाकिस्तान-चीन कनेक्शन की जांच तेज
पुलिस अब कथित पाकिस्तान-चीन कनेक्शन की विस्तृत जांच कर रही है। स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड, मोबाइल डिवाइस और OTP उपलब्ध कराने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। साथ ही बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच के जरिए कथित ठगी की रकम के अंतिम ठिकाने का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
करीब 10,000 डिवाइस निष्क्रिय किए जाने के बाद पुलिस का मानना है कि नेटवर्क के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, मामले की पूरी तस्वीर जब्त उपकरणों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल संचार के फोरेंसिक विश्लेषण के बाद ही सामने आएगी। जांच एजेंसियां संभावित स्थानीय सहयोगियों और विदेशों में बैठे ऑपरेटरों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।
