अवैध निर्माणों को संरक्षण देने और दलालों के जरिए काम कराने के आरोप; जानकीपुरम में ₹2,000 करोड़ से अधिक की सरकारी जमीन के कथित फर्जीवाड़े और 18 शिकायतकर्ताओं की भूमिका की भी पड़ताल

LDA घूसकांड की जांच का दायरा बढ़ा, 11 इंजीनियरों समेत PCS अधिकारी पर विजिलेंस की नजर

Roopa
By Roopa
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लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में सामने आए कथित घूसकांड और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के आरोपों की जांच अब व्यापक होती जा रही है। विजिलेंस टीम ने बुधवार को LDA मुख्यालय पहुंचकर करीब ढाई घंटे तक अधिकारियों और अभियंताओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए। प्रारंभिक जांच के दायरे में 11 इंजीनियरों और एक PCS अधिकारी को शामिल किया गया है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने अवैध निर्माणों के खिलाफ आने वाली शिकायतों के निस्तारण में अनियमितता बरती और कथित तौर पर दलालों के माध्यम से काम कराया।

LDA मुख्यालय से जुटाए गए दस्तावेज

विजिलेंस टीम ने LDA मुख्यालय में संबंधित विभागों की फाइलों, शिकायतों और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। जांच का मुख्य फोकस उन मामलों पर है, जिनमें अवैध निर्माण की शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई या कार्रवाई को प्रभावित करने का आरोप है।

जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि किन अभियंताओं के कार्यक्षेत्र में लगातार अवैध निर्माण की शिकायतें आती रहीं और उनके निस्तारण का तरीका क्या था। शिकायत दर्ज होने से लेकर स्थल निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई तक के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

11 इंजीनियर और PCS अधिकारी जांच के घेरे में

प्रारंभिक जांच में 11 इंजीनियरों और एक PCS अधिकारी की भूमिका सामने आई है। इनमें एक इंजीनियर सेवानिवृत्त हो चुका है, जबकि अन्य के सेवा में होने की जानकारी है। आरोपों में अवैध निर्माणों को कथित संरक्षण देना, शिकायतों के निस्तारण में अनियमितता और बिचौलियों के जरिए काम कराने जैसे मामले शामिल हैं।

विजिलेंस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अधिकारियों और कथित दलालों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या इसके बदले किसी प्रकार का आर्थिक लाभ लिया गया। जांच में सामने आए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका का आकलन किया जाएगा।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य भी जांच में

जांच एजेंसी के हाथ कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य और कुछ अभियंताओं से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग लगने की बात सामने आई है। इनमें कथित तौर पर अभियंताओं, दलालों और शिकायतकर्ताओं के बीच बातचीत दर्ज होने का दावा किया जा रहा है।

विजिलेंस इन रिकॉर्डिंग की सत्यता और बातचीत के संदर्भ की भी जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बातचीत किसी अवैध निर्माण, शिकायत के निस्तारण या कथित लेनदेन से संबंधित थी या नहीं।

18 कथित पत्रकारों की भूमिका पर भी नजर

जांच को केवल LDA अधिकारियों और अभियंताओं तक सीमित नहीं रखा गया है। IGRS पोर्टल पर सबसे अधिक अवैध निर्माण संबंधी शिकायतें दर्ज कराने वाले 18 कथित पत्रकारों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

विजिलेंस यह पता लगाना चाहती है कि इन शिकायतों के पीछे वास्तविक जनहित की समस्या थी या किसी अधिकारी, बिल्डर अथवा निर्माणकर्ता पर दबाव बनाने का उद्देश्य था। शिकायतों की संख्या, उनके विषय, संबंधित निर्माण स्थलों और शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई का आपस में मिलान किया जा रहा है।

₹2,000 करोड़ की सरकारी जमीन का मामला भी चर्चा में

इसी बीच जानकीपुरम और आसपास के छह गांवों में करीब 120 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। चारागाह, बंजर और अन्य सुरक्षित श्रेणी की सरकारी जमीन की कीमत ₹2,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।

आरोप है कि भूमाफिया और चकबंदी विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड प्रभावित किए गए और बाद में जमीन पर कब्जे तथा बिक्री का रास्ता तैयार किया गया। मामले में चार नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

निलंबित इंजीनियरों की फाइलें भी खंगाली जा रहीं

हाल में हुए चर्चित अग्निकांड के बाद निलंबित किए गए इंजीनियरों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में है। विजिलेंस उनकी ओर से लिए गए फैसलों, संबंधित फाइलों और अवैध निर्माणों से जुड़ी कार्रवाई की समीक्षा कर रही है।

जांच एजेंसी अब दस्तावेजी रिकॉर्ड, शिकायतों, ऑडियो साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित भ्रष्टाचार में किन अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका कितनी थी और क्या अवैध निर्माण तथा जमीन संबंधी मामलों के बीच कोई संगठित कड़ी मौजूद थी।

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