नई दिल्ली: मादक पदार्थों की तस्करी के एक बड़े मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बुधवार को तमिलनाडु और मिजोरम में 13 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी की टीमों ने तमिलनाडु में आठ और मिजोरम में पांच ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की तैयारी है। एजेंसी का उद्देश्य इन उपकरणों से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े संपर्कों, डिजिटल बातचीत और वित्तीय लेनदेन की जानकारी हासिल करना है।
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इस कार्रवाई में चेन्नई से ₹71 लाख नकद और 53,500 अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। NIA अब बरामद रकम के स्रोत और इसके कथित ड्रग नेटवर्क से संबंधों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम किन गतिविधियों से जुड़ी थी और इसका इस्तेमाल मादक पदार्थों की खरीद, परिवहन या वितरण में किया गया था या नहीं।
बैरेन द्वीप के पास पकड़ी गई थी ड्रग्स की बड़ी खेप
NIA की मौजूदा कार्रवाई नवंबर 2024 में बंगाल की खाड़ी में बैरेन द्वीप के पास म्यांमार की एक नाव से बरामद 6,016.87 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की खेप से जुड़े मामले में की जा रही है। यह बरामदगी देश में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े बड़े मामलों में शामिल रही है और इसी के आधार पर जांच एजेंसियों ने समुद्री मार्ग से होने वाली ड्रग तस्करी के नेटवर्क की पड़ताल शुरू की थी।
जांच के दौरान म्यांमार की नाव को जब्त करने के बाद पुलिस ने छह नागरिकों को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की आशंका को देखते हुए इसकी जांच NIA को सौंप दी गई। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन कहां से लाई गई थी और इसे भारत में पहुंचाने की योजना किस नेटवर्क ने तैयार की थी।
11 अगस्त 2025 को NIA ने दोबारा दर्ज किया मामला
NIA ने इस मामले को 11 अगस्त 2025 को दोबारा दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी। एजेंसी ने इसके बाद समुद्री मार्ग, संभावित तस्करी नेटवर्क, संदिग्ध व्यक्तियों और उनके वित्तीय संपर्कों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल तेज की। मौजूदा छापेमारी को इसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है।
तमिलनाडु और मिजोरम में एक साथ तलाशी लेने का उद्देश्य उन लोगों और ठिकानों की पहचान करना है, जिनका कथित तौर पर ड्रग्स की सप्लाई या नेटवर्क से संबंध हो सकता है। जांच एजेंसी डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की संरचना समझने की कोशिश कर रही है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच होगी
छापेमारी के दौरान जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। NIA इन उपकरणों से कथित तौर पर मिले संदेशों, संपर्कों, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल जानकारी की फोरेंसिक जांच करा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संदिग्ध लोग एक-दूसरे के संपर्क में कैसे थे और मादक पदार्थों की खेप की आवाजाही के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
एजेंसी नकद और विदेशी मुद्रा की बरामदगी को भी जांच के दायरे में रखेगी। अधिकारियों को यह पता लगाना होगा कि ₹71 लाख और 53,500 डॉलर का स्रोत क्या था और क्या इसका संबंध कथित मादक पदार्थों की तस्करी से है।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
6,016.87 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की बरामदगी ने मामले में अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की आशंका को गंभीर बनाया है। NIA अब यह पता लगाने में जुटी है कि म्यांमार से भारत तक मादक पदार्थ पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे और देश के भीतर इसकी आगे आपूर्ति की योजना किसने बनाई थी।
बुधवार की छापेमारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और नकदी की जांच से सामने आने वाली जानकारी के आधार पर एजेंसी नए संदिग्धों से पूछताछ या आगे की कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल NIA का मुख्य फोकस मादक पदार्थों की इस बड़ी खेप के स्रोत, तस्करी के मार्ग, वित्तीय नेटवर्क और इसके पीछे सक्रिय लोगों की पहचान पर है।
