नई दिल्ली: करीब ₹2,000 करोड़ के कथित चिट-फंड घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई राज्यों में कार्रवाई करते हुए 182 बैंक खातों को फ्रीज किया है। जांच के दौरान एजेंसी ने ₹1 करोड़ से अधिक नकद और छह महंगी कारें भी जब्त की हैं। यह कार्रवाई ओडिशा से जुड़े मामले में विशाखापत्तनम और हैदराबाद स्थित परिसरों पर की गई तलाशी के बाद सामने आई है। इसी बीच, दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में फरार चल रहे Five Core Electronics Limited के चार प्रमोटरों के खिलाफ नए सिरे से ओपन-एंडेड गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है।
₹2,000 करोड़ के चिट-फंड मामले में ED की कार्रवाई
ED के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने 5 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विशाखापत्तनम और हैदराबाद में पांच ठिकानों पर तलाशी ली थी। ये परिसर Welfare Buildings and Estates Private Limited (WBPL), उसके निदेशकों और मामले से जुड़े अन्य लोगों से संबंधित बताए गए हैं।
तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने 182 बैंक खातों में मौजूद धनराशि पर रोक लगाई। इसके अलावा ₹1 करोड़ से अधिक की नकदी और छह महंगी कारें भी जब्त की गईं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित चिट-फंड नेटवर्क से जुटाई गई रकम को किन माध्यमों से अलग-अलग परिसंपत्तियों और खातों में स्थानांतरित किया गया।
पूर्व विधायक से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी
ED की कार्रवाई के दायरे में आंध्र प्रदेश के पूर्व विधायक एम.वी. प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला और अन्य संबंधित व्यक्तियों के परिसरों को भी शामिल किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी का उद्देश्य कथित वित्तीय लेनदेन, निवेश और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों को जुटाना था।
यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और झारखंड के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई विभिन्न FIR और उनके आधार पर दाखिल आरोपपत्रों से जुड़ी है। ED इन्हीं मामलों में कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों और धन के लेनदेन की जांच कर रही है।
बैंक धोखाधड़ी में चार प्रमोटरों पर अदालत सख्त
दूसरे मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने Five Core Electronics Limited से जुड़े चार प्रमोटरों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टी. प्रियदर्शिनी की अदालत ने अमरजीत सिंह कालरा, सुरिंदर सिंह कालरा, जगजीत कौर कालरा और सुरिंदर कौर कालरा के खिलाफ नए सिरे से ओपन-एंडेड गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है।
अदालत की यह कार्रवाई आरोपियों के लगातार फरार रहने और जांच प्रक्रिया में उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए की गई है। ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट का मतलब है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं रहती और उन्हें पकड़े जाने तक वारंट प्रभावी रह सकता है।
नकदी और संपत्तियों की जब्ती भी जांच का हिस्सा
बैंक धोखाधड़ी मामले में जांच एजेंसियों की ओर से करोड़ों रुपये की नकदी, कई चल-अचल संपत्तियां और कथित रूप से आपत्तिजनक दस्तावेज एवं अन्य सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच के जरिए कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
दोनों मामलों में जांच का मुख्य फोकस कथित तौर पर अवैध तरीके से जुटाई या बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से स्थानांतरित की गई रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और उससे अर्जित संपत्तियों का पता लगाने पर है। ED और अन्य जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े लेनदेन की जांच कर रही हैं।
फिलहाल चिट-फंड मामले में ED की कार्रवाई और बैंक धोखाधड़ी मामले में अदालत के आदेश के बाद आरोपियों पर कानूनी शिकंजा और कस गया है। हालांकि, दोनों मामलों में सामने आए आरोपों और वित्तीय अनियमितताओं को संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में साबित किया जाना बाकी है।
