साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े फॉलोअर्स वाले X accounts को कब्जाकर क्रिप्टो योजनाओं और संदिग्ध सामग्री के प्रचार में इस्तेमाल किए जाने के खतरे को लेकर चेतावनी दी है।

₹21 करोड़ की क्रिप्टो निवेश ठगी में जिला पंचायत सदस्य गिरफ्तार, साइबर पुलिस ने खोला अंतरराज्यीय नेटवर्क का सुराग

Roopa
By Roopa
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ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सामने आए प्रदेश के सबसे बड़े साइबर ठगी मामलों में राज्य साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शाजापुर निवासी एक जिला पंचायत सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर की गई ₹21.05 करोड़ की साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में किया गया। जांच में आरोपी के खाते में ठगी की रकम में से ₹50 लाख पहुंचने की पुष्टि होने के बाद उसे गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

राज्य साइबर पुलिस के अनुसार, पीड़ित ग्वालियर के 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय हैं। शिकायत के मुताबिक दिसंबर 2025 में एक महिला ने उनसे संपर्क कर दोस्ती की और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा दिया। धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद करीब 218 दिनों तक उन्हें अलग-अलग निवेश योजनाओं का लालच दिया गया। इस दौरान पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹21 करोड़ 5 लाख 92 हजार जमा करा दिए।

जब पीड़ित ने निवेश की गई राशि और कथित मुनाफा वापस निकालने का प्रयास किया तो उनसे अतिरिक्त धन जमा करने की मांग की गई। लगातार नई शर्तें सामने आने पर उन्हें ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने राज्य साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और धन के प्रवाह की विस्तृत जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से ₹50 लाख शाजापुर निवासी गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद यह राशि कई अन्य बैंक खातों में भेज दी गई। आरोपी को गिरफ्तार कर ग्वालियर लाया गया, जहां अदालत से रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में म्यूल अकाउंट्स के जरिए संचालित एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर राज्य साइबर पुलिस की टीमें कर्नाटक और तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में जांच के लिए रवाना की गई हैं।

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जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ित ने कुल 76 अलग-अलग बैंक खातों में 106 बार धनराशि ट्रांसफर की थी। इसके बाद रकम लगभग 15 स्तरों की लेयरिंग प्रक्रिया से गुजरते हुए 20 हजार से अधिक बैंक खातों तक पहुंच गई। शुरुआती जांच के अनुसार करीब 35 प्रतिशत राशि दक्षिण भारत के विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित की गई, जिससे यह आशंका मजबूत हुई है कि यह संगठित साइबर अपराध नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी भारतीय सेना का सेवानिवृत्त कर्मी है। जांच के दौरान उसके बैंक खाते में ₹2.5 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसका बैंक खाता केवल इस मामले में ही नहीं, बल्कि अन्य साइबर ठगी मामलों में भी इस्तेमाल किया गया हो सकता है। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि आरोपी हाल ही में बैंकॉक (थाईलैंड) की यात्रा कर चुका है। पुलिस अब उसकी विदेश यात्राओं, वित्तीय लेन-देन और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रही है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, संगठित साइबर गिरोह अब म्यूल बैंक खातों और कई स्तरों की फंड लेयरिंग के जरिए ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में भेजते हैं, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग और असामान्य मुनाफे का लालच देने वाले प्रस्तावों की स्वतंत्र रूप से जांच किए बिना किसी भी खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं करना चाहिए।

राज्य साइबर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, बैंक खातों तथा म्यूल अकाउंट संचालकों की पहचान की जा रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी मामले में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

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