नई दिल्ली: रेलवे मंत्रालय ने ट्रेनों में भोजन की खराब गुणवत्ता, स्वच्छता संबंधी कमियों और कैटरिंग सेवाओं में पाई गई अनियमितताओं के मामलों में कैटरिंग सेवा प्रदाताओं पर ₹5.13 करोड़ का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई भारतीय रेलवे में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और कैटरिंग ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
रेल मंत्रालय के अनुसार यह जुर्माना निरीक्षण, यात्रियों से प्राप्त शिकायतों और निगरानी प्रक्रिया के दौरान कैटरिंग मानकों के बार-बार उल्लंघन पाए जाने के बाद लगाया गया। मंत्रालय ने बताया कि जिन सेवा प्रदाताओं ने घटिया गुणवत्ता का भोजन परोसा, स्वच्छता मानकों का पालन नहीं किया, अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया या यात्रियों को संतोषजनक सेवा नहीं दी, उनके खिलाफ वित्तीय कार्रवाई की गई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं करने वाले कैटरिंग एजेंसियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार लंबी दूरी की ट्रेनों में भोजन की गुणवत्ता यात्रियों की सबसे प्रमुख शिकायतों में शामिल रही है। यात्रियों ने बासी भोजन, खराब गुणवत्ता, अस्वच्छ तैयारी और भंडारण, भोजन की कम मात्रा, पैकेजिंग में खामियां, भोजन की आपूर्ति में देरी और कुछ मामलों में अधिक कीमत वसूलने जैसी शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के बाद रेलवे ने कैटरिंग सेवाओं की निगरानी और निरीक्षण को और सख्त कर दिया है।
मंत्रालय ने बताया कि बेस किचन, पेंट्री कार और भोजन तैयार करने वाली इकाइयों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है ताकि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। विभिन्न शिकायत पोर्टलों और यात्री फीडबैक के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर बार-बार सामने आने वाली कमियों की पहचान की जा रही है और उनके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जिन एजेंसियों द्वारा लगातार नियमों का उल्लंघन किया जाएगा, उनके अनुबंध समाप्त करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
रेलवे ने ट्रेनों में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए कई सुधारात्मक पहल भी शुरू की हैं। इनमें गुणवत्ता जांच को मजबूत करना, आकस्मिक निरीक्षण, खाद्य तैयारी इकाइयों की नियमित निगरानी, स्वच्छता मानकों के पालन पर विशेष ध्यान और तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का अधिक उपयोग शामिल है। मंत्रालय ने यात्रियों से भी अपील की है कि यात्रा के दौरान यदि उन्हें भोजन या कैटरिंग सेवा से जुड़ी कोई समस्या दिखाई दे तो वे तत्काल आधिकारिक शिकायत माध्यमों के जरिए इसकी सूचना दें, ताकि उसी समय आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों से मिलने वाली प्रतिक्रिया अब गुणवत्ता मूल्यांकन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का विश्लेषण कर सेवा प्रदाताओं के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है और उसी आधार पर जुर्माना या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कैटरिंग एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार सुनिश्चित करना है।
रेल मंत्रालय ने दोहराया कि ट्रेनों में परोसा जाने वाला भोजन निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों और अनुबंध की शर्तों के अनुरूप होना चाहिए। सेवा प्रदाताओं को स्वीकृत रसोईघरों में भोजन तैयार करना, उचित भंडारण व्यवस्था बनाए रखना, पूरी आपूर्ति श्रृंखला में स्वच्छता सुनिश्चित करना और निर्धारित समय पर भोजन उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इन मानकों का उल्लंघन करने पर उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार वित्तीय दंड लगाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के विशाल रेलवे नेटवर्क में कैटरिंग सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित निरीक्षण, पारदर्शी निगरानी व्यवस्था और यात्रियों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि केवल आर्थिक दंड पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वाले सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कठोर अनुबंधीय कार्रवाई और निरंतर गुणवत्ता ऑडिट भी जरूरी हैं। ₹5.13 करोड़ का यह जुर्माना इस बात का संकेत है कि रेलवे मंत्रालय यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराने के लिए अब अधिक सख्त और जवाबदेह व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
