कोच्चि: केरल स्टेट काजू डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (KSCDC) में वर्ष 2006 से 2015 के बीच कच्चे काजू के आयात में कथित वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के गबन से जुड़े मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। एजेंसी ने केरल उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि मामले में निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD) के.ए. रतीश और तत्कालीन अध्यक्ष आर. चंद्रशेखरन के खिलाफ अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) की अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। इससे पहले दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे।
CBI की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, अब आरोपियों पर लोक सेवक के रूप में आपराधिक कदाचार करने तथा पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़ना आवश्यक पाया गया, जिसके बाद आरोपों में संशोधन किया गया।
यह रिपोर्ट उच्च न्यायालय में लंबित अवमानना याचिका के दौरान प्रस्तुत की गई। यह याचिका राज्य सरकार द्वारा अभियोजन की स्वीकृति देने से इनकार किए जाने के खिलाफ दायर की गई थी। अदालत ने पहले ही सरकार को आवश्यक स्वीकृति देने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश के बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। अंततः जुलाई 2026 के मध्य में CBI को अभियोजन स्वीकृति प्राप्त हुई, जिसके बाद एजेंसी ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी।
मामले के दौरान केरल उच्च न्यायालय के समक्ष एक अन्य याचिका भी आई थी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन के पूर्व अतिरिक्त निजी सचिव के.एम. शाजहान ने दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बहु-करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बावजूद के.ए. रतीश को सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि यह “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति” है और भ्रष्टाचार समाज के लिए गंभीर चुनौती है। अदालत ने यह भी कहा था कि मामले पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
वर्तमान में के.ए. रतीश केरल खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा वह RUTRONIX (Kerala State Rural Women’s Electronics Industrial Cooperative Federation Ltd.) के प्रबंध निदेशक तथा Kerala Khadi Workers’ Welfare Fund Board के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का दायित्व भी संभाल रहे हैं। याचिकाकर्ता ने इन महत्वपूर्ण पदों पर उनकी निरंतर नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे और सरकार से कार्रवाई की मांग की थी।
मीडिया से बातचीत में के.ए. रतीश ने कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय में CBI द्वारा दाखिल रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अभी तक अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया है और इस संबंध में उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से मुलाकात कर आगे की स्थिति पर चर्चा करेंगे। उन्होंने अदालत की मौखिक टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि वे उचित कानूनी मंच पर उन्हें चुनौती देंगे।
CBI की जांच के केंद्र में वर्ष 2006 से 2015 के बीच केरल स्टेट काजू डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा कच्चे काजू के आयात में कथित वित्तीय अनियमितताएं हैं। एजेंसी आरोपों की जांच कर रही है कि आयात प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन में नियमों का उल्लंघन करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। अभियोजन स्वीकृति मिलने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं जुड़ने के बाद मामले की सुनवाई अब अधिक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप जुड़ने से मामले की गंभीरता बढ़ जाती है, क्योंकि अब जांच केवल धोखाधड़ी और साजिश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सार्वजनिक पद के दुरुपयोग, अवैध लाभ और सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग की भी विस्तार से जांच होगी। आने वाले समय में अदालत में अभियोजन की कार्यवाही और CBI द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेंगे।
