गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए जीआरपी में तैनात एक सिपाही को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी सिपाही ने गोरखनाथ थाने में तैनाती के दौरान कथित रूप से फर्जी नाम और पते पर तैयार किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किया, जिसके आधार पर दिल्ली और पंजाब के गैंगस्टरों समेत कई लोगों के पासपोर्ट जारी हुए। अब तक 22 संदिग्ध पासपोर्ट मामलों की पहचान की जा चुकी है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
गिरफ्तार सिपाही की पहचान शशिकांत यादव के रूप में हुई है, जो गाजीपुर जिले के नसीरपुर कुसुम गांव का निवासी है और वर्तमान में गोरखपुर जीआरपी अनुभाग कार्यालय में तैनात था। जांच में सामने आया है कि गोरखनाथ थाने में उसकी तैनाती के दौरान लगभग 45 पासपोर्ट आवेदनों का पुलिस सत्यापन किया गया था। इनमें से 22 मामलों में फर्जी नाम, गलत पता अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन मामलों में किन-किन व्यक्तियों ने फर्जी पहचान का सहारा लेकर पासपोर्ट प्राप्त किए और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए कथित पुलिस सत्यापन के बाद संबंधित व्यक्तियों को वैध पासपोर्ट जारी हो गए, जिनका इस्तेमाल देश और विदेश में यात्रा के लिए किया गया। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है, जिसमें दस्तावेज तैयार करने वाले, सत्यापन कराने वाले और लाभार्थी आपस में जुड़े हुए थे। इसी कारण अब वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों की तैयारी और अन्य संबंधित पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
जांच में कई चर्चित मामले भी सामने आए हैं। इनमें अमृतसर निवासी दयाल मल्ल का मामला शामिल है, जिसने वर्ष 2024 में गोरखनाथ क्षेत्र के लच्छीपुर पते का इस्तेमाल कर कथित रूप से फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। बाद में उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। इसी प्रकार दिल्ली के शालीमार बाग निवासी हरसिमरन सिंह उर्फ बादल पर भी राजेश सिंह के नाम से लच्छीपुर के पते पर वर्ष 2024 में पासपोर्ट बनवाने का आरोप है। उसे दिसंबर 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
सबसे गंभीर मामला पंजाब के अमृतसर निवासी कथित गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला का सामने आया है। जांच के अनुसार उसने दीपूपिंह, पिता संदीप सिंह, के नाम से लच्छीपुर, भगवती चौराहा के पते पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर पासपोर्ट हासिल किया और उसी के आधार पर विदेश चला गया। बाद में इंडोनेशिया से डिपोर्ट किए जाने के बाद उसके फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आया, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी। अधिकारियों का मानना है कि इसी मामले से कई अन्य संदिग्ध पासपोर्टों का भी सुराग मिला।
जांच के अनुसार शशिकांत यादव की अगस्त 2023 में गोरखनाथ थाने में तैनाती हुई थी और लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के दौरान ही कथित फर्जी पासपोर्ट सत्यापन का यह नेटवर्क सक्रिय रहा। फरवरी 2025 में उसे निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया गया था और करीब छह महीने पहले उसका स्थानांतरण जीआरपी में कर दिया गया। अब उसकी भूमिका और उसके द्वारा किए गए अन्य पासपोर्ट सत्यापन मामलों की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी सिपाही की गिरफ्तारी के बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले अन्य व्यक्तियों, पासपोर्ट बनवाने वालों और इस कथित नेटवर्क से जुड़े संभावित सहयोगियों की तलाश जारी है। पासपोर्ट रिकॉर्ड, सत्यापन अभिलेख, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य सामग्री का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में जिन व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एजेंसियां इस पूरे फर्जी पासपोर्ट रैकेट की सभी कड़ियों को जोड़ने और इसके वास्तविक दायरे का पता लगाने में जुटी हुई हैं।
