मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में साइबर क्राइम सेल, मुहम्मदाबाद गोहना थाना और शहर कोतवाली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने झारखंड के रहने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो विधि-विरुद्ध बालकों (नाबालिगों) को हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह चोरी किए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर यूपीआई आधारित साइबर ठगी को अंजाम देता था। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी दो माह पहले मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र में हुई लगभग ₹6 लाख की साइबर ठगी की घटना में भी कथित रूप से शामिल थे। मामले में बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर की गई। शनिवार को शहर कोतवाली पुलिस क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह के कुछ सदस्य शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित रामलीला रेलवे मैदान के पास किसी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में मौजूद हैं। सूचना मिलते ही साइबर क्राइम सेल, मुहम्मदाबाद गोहना थाना और शहर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर घेराबंदी कर कार्रवाई की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने झारखंड निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो नाबालिगों को संरक्षण में लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुदामा महतो, राजू शर्मा और छोटू कुमार साह के रूप में हुई है। तीनों झारखंड के साहिबगंज जिले के तालझारी थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामले की भी जांच चल रही थी और वे काफी समय से फरार थे। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 23 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में इनमें से 17 मोबाइल फोन विभिन्न स्थानों से चोरी किए गए पाए गए हैं। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां इन उपकरणों में मौजूद यूपीआई लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड, संपर्क सूची, चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान की जा सके।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर खुलासा किया कि वे भीड़भाड़ वाले बाजारों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों से लोगों के मोबाइल फोन चोरी करते थे। इसके बाद चोरी किए गए मोबाइल में मौजूद सिम कार्ड और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग कर क्यूआर कोड के माध्यम से नई यूपीआई आईडी तैयार की जाती थी। इसी डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल कर पीड़ितों के बैंक खातों से अनधिकृत वित्तीय लेनदेन किए जाते थे। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि चोरी किए गए कुछ मोबाइल फोन झारखंड ले जाकर अन्य साइबर अपराधियों को बेच दिए जाते थे, जिससे पूरे नेटवर्क को आर्थिक लाभ मिलता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी जून महीने में मुहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र में हुई करीब ₹6 लाख की साइबर ठगी की घटना में भी कथित रूप से शामिल थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। इसके लिए बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार मोबाइल फोन की चोरी अब केवल संपत्ति संबंधी अपराध नहीं रह गई है, बल्कि इससे जुड़े बैंकिंग और डिजिटल भुगतान माध्यमों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की जा सकती है। उन्होंने सलाह दी कि मोबाइल फोन चोरी होने पर तुरंत सिम कार्ड ब्लॉक कराएं, बैंक खातों से जुड़े यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग को निष्क्रिय कराएं तथा बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच जारी है।
