देहरादून: उत्तराखंड के सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) के स्टेट डेटा सेंटर पर एक बार फिर बड़ा साइबर हमला हुआ है, जिससे राज्य की 20 से अधिक सरकारी वेबसाइटों की सेवाएं करीब 15 घंटे तक बाधित रहीं। अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार देर रात हुए इस हमले के बाद सुरक्षा कारणों से डेटा सेंटर के प्रभावित सर्वर को तत्काल बंद करना पड़ा, ताकि मैलवेयर का संक्रमण अन्य प्रणालियों तक न फैल सके। प्रारंभिक जांच में इस हमले के लिए एक कथित रशियन मैलवेयर को जिम्मेदार माना जा रहा है। फिलहाल सभी प्रभावित सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, जबकि विशेषज्ञ पूरे नेटवर्क का फोरेंसिक विश्लेषण कर संभावित नुकसान का आकलन कर रहे हैं।
आईटीडीए के अधिकारियों के अनुसार साइबर सुरक्षा निगरानी प्रणाली ने शुक्रवार देर रात असामान्य गतिविधियों का पता लगाया। प्रारंभिक जांच में मालूम हुआ कि डेटा सेंटर के कुछ सर्वरों पर संदिग्ध मैलवेयर सक्रिय हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी टीम ने तत्काल प्रभावित सर्वर को ऑफलाइन कर दिया, जिससे संक्रमण को अन्य सरकारी प्रणालियों तक फैलने से रोका जा सके। इस दौरान कई महत्वपूर्ण सरकारी वेबसाइटें और ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रहीं, जिससे विभिन्न विभागों के डिजिटल कार्य प्रभावित हुए।
अधिकारियों ने बताया कि हमले का सबसे पहला असर पुलिस के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) पोर्टल पर देखा गया। यह वही डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से ऑनलाइन प्राथमिकी पंजीकरण, आपराधिक रिकॉर्ड प्रबंधन और पुलिस से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। इसके बाद अन्य विभागों की वेबसाइटों पर भी तकनीकी व्यवधान दिखाई देने लगे। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में किसी संवेदनशील डेटा की चोरी या स्थायी क्षति की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विस्तृत डिजिटल फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आईटीडीए के निदेशक आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि प्रारंभिक विश्लेषण के आधार पर यह एक रशियन मैलवेयर अटैक प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही संदिग्ध गतिविधियों का पता चला, तकनीकी टीम ने तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करते हुए सर्वर को बंद कर दिया। इसके बाद विशेषज्ञों ने प्रभावित प्रणालियों को अलग कर संक्रमण को नियंत्रित किया। शनिवार शाम तक स्थिति सामान्य कर दी गई और सभी सरकारी वेबसाइटों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा चालू कर दिया गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि संभावित नुकसान और हमले के स्रोत की जांच जारी है।
यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड का स्टेट डेटा सेंटर साइबर हमले का शिकार बना हो। इससे पहले 4 अक्टूबर 2024 को भी डेटा सेंटर पर बड़े पैमाने पर मैलवेयर और रैंसमवेयर हमला हुआ था। उस घटना के कारण मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, ई-ऑफिस प्रणाली और 180 से अधिक सरकारी वेबसाइटें अस्थायी रूप से प्रभावित हो गई थीं। इसके अलावा इसी वर्ष जनवरी में भी एक अन्य साइबर हमले के चलते 10 से अधिक सरकारी वेबसाइटों की सेवाएं बाधित हुई थीं। लगातार हो रहे इन साइबर हमलों ने राज्य की डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार सरकारी डेटा सेंटरों पर होने वाले मैलवेयर हमले केवल वेबसाइटों को प्रभावित नहीं करते, बल्कि यदि समय रहते उन्हें नियंत्रित न किया जाए तो महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड, नागरिक सेवाएं और संवेदनशील डिजिटल अवसंरचना भी जोखिम में आ सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों से बचाव के लिए नेटवर्क सेगमेंटेशन, रियल-टाइम थ्रेट मॉनिटरिंग, मल्टी-लेयर एंडपॉइंट सुरक्षा, नियमित सुरक्षा ऑडिट और ऑफलाइन बैकअप जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत करना आवश्यक है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही प्रभावित प्रणालियों को तुरंत अलग करना और डिजिटल फोरेंसिक जांच शुरू करना सबसे प्रभावी रणनीति मानी जाती है।
फिलहाल आईटीडीए, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों की टीमें हमले की तकनीकी प्रकृति, संभावित प्रवेश बिंदु और इसके वास्तविक प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। यदि जांच में किसी विदेशी साइबर नेटवर्क, संगठित हैकर समूह या अन्य आपराधिक तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिलते हैं, तो मामले में आगे की कानूनी और तकनीकी कार्रवाई संबंधित एजेंसियों के सहयोग से की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि राज्य की डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।
