जम्मू में जीवन बीमा पॉलिसी सरेंडर कर ₹10.75 लाख की कथित धोखाधड़ी मामले में पूर्व बीमा कर्मचारी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

बीमा पॉलिसी सरेंडर में ₹10.75 लाख की कथित धोखाधड़ी: पूर्व बीमा कर्मचारी के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल

Team The420
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जम्मू: जम्मू-कश्मीर में आर्थिक अपराधों के मामलों की जांच कर रही अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जीवन बीमा पॉलिसी से जुड़े कथित ₹10.75 लाख के धोखाधड़ी मामले में एक पूर्व बीमा कर्मचारी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी पर जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी के माध्यम से बीमा पॉलिसी सरेंडर कर धनराशि अपने नियंत्रण वाले कथित फर्जी बैंक खाते में स्थानांतरित कराने का आरोप है। मामले में न्यायालय के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किए जाने के साथ अब आगे की न्यायिक कार्यवाही का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, आरोपपत्र आरोपी पारुल शर्मा के खिलाफ जम्मू स्थित तृतीय अतिरिक्त मुंसिफ न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज प्राथमिकी संख्या 02/2013 से संबंधित है, जिसमें तत्कालीन प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा उनका उपयोग करने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

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जांच एजेंसी के अनुसार, मामले की शुरुआत उस शिकायत से हुई थी जिसमें एक निजी जीवन बीमा कंपनी की जम्मू शाखा के तत्कालीन शाखा प्रभारी ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने एक वास्तविक पॉलिसीधारक के नाम पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए बीमा पॉलिसी सरेंडर करा दी। शिकायत के अनुसार, इसके बाद पॉलिसी से संबंधित ₹10,75,742.95 की राशि कथित तौर पर भारतीय स्टेट बैंक में वास्तविक पॉलिसीधारक के नाम से खोले गए एक फर्जी खाते में स्थानांतरित कर दी गई।

जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने बीमा कंपनी और संबंधित बैंक से दस्तावेज एवं रिकॉर्ड एकत्र किए। एजेंसी का दावा है कि रिकॉर्ड के विश्लेषण में सामने आया कि कथित रूप से डुप्लीकेट पॉलिसी दस्तावेज हासिल किए गए, सरेंडर से जुड़े कागजात फर्जी तरीके से तैयार किए गए और बाद में कथित रूप से जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खोला गया। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बीमा राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई।

ईओडब्ल्यू ने यह भी दावा किया है कि जांच के दौरान इसी प्रकार की कार्यप्रणाली अपनाकर दो अन्य बीमा पॉलिसियों को भी कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए सरेंडर करने के प्रयासों के संकेत मिले। हालांकि इन मामलों की परिस्थितियों और संभावित वित्तीय प्रभाव की जांच अलग से की गई तथा उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और फोरेंसिक परीक्षण सहित विभिन्न तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। ईओडब्ल्यू का कहना है कि जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की कथित भूमिका स्थापित होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। अब न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेगा और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा क्षेत्र में दस्तावेजों की सत्यता का बहु-स्तरीय सत्यापन, ग्राहक पहचान प्रक्रिया को और मजबूत बनाना तथा बैंकिंग और बीमा संस्थानों के बीच डिजिटल सत्यापन प्रणाली को प्रभावी बनाना इस प्रकार की कथित धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वित्तीय संस्थानों द्वारा संदिग्ध लेनदेन और असामान्य दस्तावेजी गतिविधियों की समय रहते पहचान भी ऐसे मामलों को रोकने में सहायक हो सकती है।

मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब आगे की सुनवाई न्यायालय में होगी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।

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