बरेली में जापान वीजा और हवाई टिकट दिलाने के नाम पर ₹92,300 की कथित ठगी के मामले में ट्रैवल कंपनी की निदेशक और कर्मचारी पर केस दर्ज हुआ है।

लिंक पर क्लिक करते ही खाते से ₹99,500 उड़े: बिना OTP साझा किए दो ट्रांजैक्शन, साइबर ठगी की जांच शुरू

Team The420
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अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में एक व्यक्ति के बैंक खाते से कथित तौर पर ₹99,500 की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित की पत्नी के मोबाइल फोन पर एक संदिग्ध लिंक वाला संदेश आया था। लिंक खुलने के कुछ ही समय बाद बचत खाते से दो अलग-अलग अनधिकृत ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हो गए। पीड़ित का दावा है कि इस दौरान न तो किसी के साथ वन-टाइम पासवर्ड (OTP) साझा किया गया और न ही बैंकिंग पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी दी गई। घटना के बाद पीड़ित ने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाता ब्लॉक कराया, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल तथा 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस में मामला दर्ज कराया।

शिकायत के अनुसार, घटना गुरुवार को हुई। पीड़ित की पत्नी के मोबाइल पर एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें एक लिंक भेजा गया था। जैसे ही लिंक खोला गया, उसके बाद बैंक खाते से पहली बार ₹90,000 और फिर ₹9,500 की राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गई। खाते से धनराशि निकलने की जानकारी मिलने पर परिवार ने तुरंत बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क कर खाते को ब्लॉक कराने का अनुरोध किया ताकि आगे किसी अतिरिक्त लेनदेन को रोका जा सके।

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पीड़ित ने इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर भी घटना की सूचना दी। बाद में संबंधित पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ठगी की रकम किसी अन्य बैंक खाते में स्थानांतरित की गई, जिसके आधार पर पुलिस अब धनराशि के प्रवाह और लाभार्थी खातों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

पुलिस ने धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान मोबाइल फोन, संदिग्ध लिंक, बैंकिंग लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड, आईपी लॉग, लाभार्थी खाते और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक और तकनीकी सेवा प्रदाताओं से भी जानकारी जुटाई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि साइबर अपराधियों ने किस तकनीक का इस्तेमाल कर लेनदेन को अंजाम दिया।

प्रारंभिक स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि भेजा गया लिंक किसी फर्जी वेबसाइट, फिशिंग पेज, मैलवेयर या रिमोट एक्सेस तकनीक से जुड़ा था या नहीं। साइबर अपराधी अक्सर बैंक, कूरियर, केवाईसी अपडेट, रिफंड, इनाम या सरकारी सेवा के नाम पर लिंक भेजकर लोगों को क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। कई मामलों में लिंक खोलने के बाद मोबाइल डिवाइस की जानकारी तक पहुंच बनाने या उपयोगकर्ता को फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर बैंकिंग विवरण हासिल करने की कोशिश की जाती है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। उनके अनुसार, साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को फंसाने का प्रयास करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को बैंक, सरकारी एजेंसी या किसी अन्य संस्था के नाम से संदिग्ध लिंक प्राप्त हो, तो उसकी सत्यता आधिकारिक माध्यम से अवश्य जांचनी चाहिए। किसी भी असामान्य बैंकिंग गतिविधि का पता चलते ही तुरंत बैंक को सूचित करना, खाता अस्थायी रूप से ब्लॉक कराना, 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करना और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट करना नुकसान कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन और बैंकिंग ऐप को नियमित रूप से अपडेट रखना, केवल आधिकारिक स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करना, संदिग्ध संदेशों और लिंक से दूरी बनाए रखना तथा खाते की लेनदेन संबंधी सूचनाओं पर लगातार नजर रखना ऐसे मामलों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पुलिस ने भी लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की तत्काल सूचना संबंधित एजेंसियों को देने की अपील की है।

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