ED ने BSNL कर्मचारी सहकारी समिति से जुड़े कथित धनशोधन मामले में ₹37.59 करोड़ मूल्य की 120 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं।

₹37.59 करोड़ की संपत्तियां अटैच, BSNL कर्मचारी सहकारी समिति के कथित ₹300 करोड़ से अधिक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई

Team The420
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नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित बीएसएनएल कर्मचारी सहकारी समिति (BSNL Employees’ Co-operative Society) से जुड़े कथित धनशोधन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹37.59 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं। एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि अब तक की जांच में ₹300 करोड़ से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जबकि विभागीय जांच में कुल कथित घोटाले का आकार लगभग ₹350 करोड़ आंका गया था।

ईडी के अनुसार अटैच की गई संपत्तियों में तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जिलों में स्थित लगभग 120 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जो मामले में नामजद 16 आरोपियों से संबंधित बताई गई हैं। एजेंसी ने इन संपत्तियों के संबंध में अस्थायी कुर्की आदेश जारी कर आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों को भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इन संपत्तियों को कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदे जाने की आशंका के आधार पर अटैच किया गया है, ताकि जांच पूरी होने तक उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।

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जांच के दायरे में पूर्व समिति अध्यक्ष ए.आर. गोपीनाथन, पूर्व सचिव प्रदीप कुमार, क्लर्क राजीव तथा प्रबंधन समिति के कई पूर्व सदस्य और कर्मचारी शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि पूर्व अध्यक्ष गोपीनाथन का निधन हो चुका है। कुल 19 व्यक्तियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है, जिनमें समिति के पदाधिकारी, बोर्ड सदस्य और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

ईडी ने हाल ही में इस मामले में धन के प्रवाह और कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने के उद्देश्य से जांच को फिर से तेज किया है। जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्ति खरीद, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कथित गबन की राशि का उपयोग किन संपत्तियों के अधिग्रहण में किया गया। अधिकारियों के अनुसार संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का उद्देश्य संभावित अवैध परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखना और भविष्य की कानूनी प्रक्रिया के लिए उपलब्ध बनाए रखना है।

इस मामले में पहले हुई विभागीय जांच में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आकार लगभग ₹350 करोड़ बताया गया था। इसके आधार पर मई 2026 में संबंधित अधिकारियों ने राजस्व वसूली की प्रक्रिया शुरू की और आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए। हालांकि, जमाकर्ताओं के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि वसूली की कार्रवाई अपेक्षाकृत धीमी रही, जिससे आरोपियों को न्यायालयों का रुख करने और कानूनी राहत प्राप्त करने का पर्याप्त समय मिल गया।

बीएसएनएल डिपॉजिटर्स फोरम के संयोजक एन.ए. अब्राहम ने दावा किया कि तिरुवनंतपुरम और कोल्लम में आरोपियों से जुड़ी कुल 212 संपत्तियां पहले ही कानूनी रूप से अटैच की जा चुकी हैं। उनका कहना है कि यदि इन संपत्तियों की समयबद्ध नीलामी की जाए तो प्रभावित जमाकर्ताओं के कम से कम आधे दावों का भुगतान संभव हो सकता है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि आधिकारिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिससे प्रभावित जमाकर्ताओं को राहत मिलने में देरी हो रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि धनशोधन और सहकारी संस्थाओं से जुड़े वित्तीय अपराधों में संपत्तियों की प्रारंभिक कुर्की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इससे कथित अपराध से अर्जित परिसंपत्तियों के हस्तांतरण या बिक्री की संभावना कम हो जाती है और भविष्य में अदालत के आदेश के अनुसार उनकी जब्ती, नीलामी या प्रभावित पक्षों को राहत देने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, संपत्ति लेनदेन तथा अन्य साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के दौरान यदि नए तथ्य सामने आते हैं या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो कार्रवाई का दायरा और विस्तारित किया जा सकता है। फिलहाल एजेंसी का ध्यान कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का पूरा पता लगाने और धन के प्रवाह की श्रृंखला स्थापित करने पर केंद्रित है।

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