फाइनेंस कराने का झांसा देकर आधार, पैन, बैंक दस्तावेज और हस्ताक्षरित चेक लेने का आरोप; न वाहन मिला, न लोन की राशि, लेकिन पीड़ित के खाते से कटने लगी ईएमआई।

पुरानी पिकअप बेचने के नाम पर ₹5.75 लाख के वाहन लोन की कथित धोखाधड़ी, कोर्ट के आदेश पर पांच के खिलाफ केस दर्ज

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By Roopa
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आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पुरानी पिकअप वाहन की खरीद के नाम पर ₹5.75 लाख के कथित वाहन लोन धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर सिधारी थाना पुलिस ने वाहन विक्रेता, फाइनेंस कंपनी के प्रबंधक, फाइनेंसर, बैंक शाखा प्रबंधक और वाहन स्वामी समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि पीड़ित को वाहन फाइनेंस कराने का भरोसा देकर उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम पर वाहन ऋण स्वीकृत करा लिया गया, लेकिन उसे न तो पिकअप वाहन मिला और न ही लोन की राशि। इसके विपरीत उसके बैंक खाते से ऋण की मासिक किस्तें (ईएमआई) कटनी शुरू हो गईं।

पुलिस के अनुसार, यह मामला सिधारी क्षेत्र निवासी विजय शंकर यादव की शिकायत पर दर्ज किया गया है। पीड़ित ने न्यायालय में दायर प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि उसने एक पुरानी पिकअप खरीदने के लिए वाहन विक्रेता अशोक कुमार गौड़ से संपर्क किया था। सौदे के दौरान उसे भरोसा दिलाया गया कि वाहन के लिए आसान शर्तों पर फाइनेंस उपलब्ध करा दिया जाएगा और पूरी प्रक्रिया वैधानिक तरीके से पूरी होगी।

शिकायत के मुताबिक, इस प्रक्रिया के तहत इंडोस्टार कैपिटल के मैनेजर धीरज कुमार मिश्रा, फाइनेंसर सरवन गिरी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कोटिला शाखा के प्रबंधक तथा वाहन स्वामी यासिर अख्तर भी कथित तौर पर शामिल थे। आरोप है कि सभी ने मिलकर पीड़ित से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज और हस्ताक्षरित चेक ले लिए। इसके बाद उसके नाम पर ₹5.75 लाख का वाहन ऋण स्वीकृत करा दिया गया।

पीड़ित का आरोप है कि ऋण स्वीकृत होने के बावजूद उसे न तो वाहन की डिलीवरी दी गई और न ही लोन की राशि उसके खाते में आई। जब उसने वाहन विक्रेता और अन्य संबंधित लोगों से जानकारी मांगी तो उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में जब उसने सीधे वाहन स्वामी से संपर्क किया तो कथित तौर पर पता चला कि उसे भी वाहन बिक्री की पूरी रकम प्राप्त नहीं हुई थी। इससे पूरे लेनदेन पर संदेह और गहरा हो गया।

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शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस दौरान फर्जी ‘नो-ड्यूज’ प्रमाणपत्र तैयार कर वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया। इस कथित फर्जीवाड़े के बीच पीड़ित के बैंक खाते से वाहन ऋण की मासिक किस्तें स्वतः कटनी शुरू हो गईं, जबकि उसके पास न वाहन था और न ही ऋण की राशि पहुंची थी। पीड़ित का कहना है कि उसने जब इस संबंध में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और विरोध दर्ज कराया तो उसे कथित तौर पर धमकियां भी दी गईं।

स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले में उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सिधारी थाना पुलिस ने पांचों नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है और सभी वित्तीय दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, वाहन स्वामित्व से जुड़े अभिलेख तथा कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जाएगा कि वाहन ऋण की राशि किस खाते में गई और पूरे लेनदेन में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका रही।

सिधारी थाना पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र या बैंकिंग प्रक्रिया के दुरुपयोग के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

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