अमेरिकी अधिकारियों का आरोप- शरण (Asylum) आवेदनों में एक जैसी कहानियां, समान तथ्य और कॉपी-पेस्ट दस्तावेजों का इस्तेमाल; भारतीय मूल के लोगों के लिए इमिग्रेशन मामलों की पैरवी करने वाले वकील के खिलाफ सिविल पेनल्टी की प्रक्रिया शुरू।

118 फर्जी दस्तावेज, 54 इमिग्रेशन मामले: भारतीय मूल के वकील पर अमेरिका में ₹4 करोड़ से अधिक के जुर्माने की कार्रवाई

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By Roopa
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वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय मूल के एक इमिग्रेशन वकील के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी शरण (असाइलम) आवेदन दाखिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security-DHS) और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने भारतीय मूल के वकील सूरज राज सिंह पर 4.70 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब ₹4 करोड़) से अधिक का सिविल जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने कई अलग-अलग ग्राहकों की ओर से दाखिल किए गए आवेदनों में एक जैसी भाषा, समान तथ्य और कथित रूप से कॉपी किए गए उत्पीड़न के विवरण का इस्तेमाल किया।

डीएचएस के अनुसार, सूरज राज सिंह अमेरिका के विभिन्न राज्यों में इमिग्रेशन मामलों की पैरवी करते हैं और मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए शरण संबंधी आवेदन दाखिल करते रहे हैं। जांच में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 54 अलग-अलग इमिग्रेशन मामलों में कुल 118 फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाखिल किए। इन दस्तावेजों में कई आवेदनों की भाषा, घटनाओं का विवरण और तथ्यों का प्रस्तुतिकरण लगभग समान पाया गया, जिससे अधिकारियों को कथित धोखाधड़ी का संदेह हुआ।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न आवेदकों द्वारा उत्पीड़न और प्रताड़ना के जो विवरण प्रस्तुत किए गए, उनमें भी कई समानताएं मिलीं। जांच के दौरान यह पाया गया कि अलग-अलग लोगों की ओर से दाखिल याचिकाओं में इस्तेमाल किए गए कथित उत्पीड़न के विवरण एक-दूसरे से काफी हद तक मेल खाते हैं। इसी आधार पर ICE ने सूरज राज सिंह के खिलाफ अधिकतम 4,70,584 अमेरिकी डॉलर का सिविल जुर्माना लगाने की मांग की है।

डीएचएस के जनरल काउंसल जेम्स पर्सिवल ने कहा कि फर्जी शरण दावे न केवल अमेरिकी इमिग्रेशन प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों के कारण वास्तविक जरूरतमंद आवेदकों के मामलों में देरी होती है और अवैध रूप से रह रहे गंभीर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन इमिग्रेशन प्रणाली के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा और ऐसे मामलों में शामिल लोगों तथा उनके कानूनी प्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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डीएचएस के मुताबिक, यह कार्रवाई मई 2026 में जारी उस निर्देश के बाद की जा रही है, जिसमें फर्जी शरण आवेदनों पर कड़ी निगरानी रखने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने को कहा गया था। विभाग का कहना है कि यह दूसरा बड़ा मामला है, जिसमें किसी इमिग्रेशन वकील के खिलाफ कथित दस्तावेजी धोखाधड़ी को लेकर सिविल जुर्माने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इससे पहले जून 2026 में भारतीय मूल के ही एक अन्य इमिग्रेशन वकील विनोद डोड्डामानी के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उन पर भी कथित तौर पर फर्जी शरण आवेदन दाखिल करने का आरोप लगाया गया था और अमेरिकी अधिकारियों ने उनके खिलाफ 2.55 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा था। दोनों मामलों को अमेरिकी प्रशासन इमिग्रेशन प्रणाली में कथित दस्तावेजी धोखाधड़ी के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा मान रहा है।

हालांकि, सूरज राज सिंह के खिलाफ मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और इस संबंध में अंतिम निर्णय आना बाकी है। फिलहाल यह कार्रवाई सिविल पेनल्टी लगाने की प्रस्तावित प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत अथवा संबंधित प्राधिकरण के अंतिम आदेश के बाद ही यह तय होगा कि आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं तथा जुर्माने की अंतिम राशि क्या होगी।

अमेरिकी एजेंसियां अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, इमिग्रेशन आवेदनों और अन्य रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और समान कथानक वाले आवेदन दाखिल करने का यह तरीका कितने समय से अपनाया जा रहा था और इससे जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। मामले की आगे की सुनवाई और जांच के आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

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