झारखंड शराब घोटाले की जांच में ACB ने पूर्व आबकारी आयुक्त समेत तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया है।

शराब घोटाले की जांच तेज: ACB ने पूर्व आबकारी आयुक्त समेत तीन पूर्व अधिकारियों को फिर किया तलब

Team The420
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रांची: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में नया मोड़ आया है। राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आबकारी एवं मद्यनिषेध विभाग के तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को पूछताछ के लिए दोबारा तलब किया है। एजेंसी ने उन्हें 4 अगस्त को उपस्थित होकर पूर्व में दिए गए बयानों, उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं के कारण राज्य सरकार को कितना राजस्व नुकसान हुआ और निर्णय प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

ACB द्वारा जारी समन पूर्व आबकारी आयुक्त गजेंद्र सिंह, झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के पूर्व महाप्रबंधक सुधीर कुमार दास तथा पूर्व आयुक्त अमित प्रकाश को भेजा गया है। एजेंसी के अनुसार इन अधिकारियों से पहले दर्ज किए गए बयानों और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उनसे अतिरिक्त जानकारी और दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।

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यह मामला पिछले वर्ष दर्ज किए गए कथित शराब घोटाले से जुड़ा है। जांच के शुरुआती चरण में ACB ने इन तीनों अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं हो पाने के कारण उन्हें कानून के प्रावधानों के तहत जमानत मिल गई थी। इसके बावजूद जांच जारी रही और एजेंसी लगातार दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन तथा प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा कर रही है।

जांच एजेंसी के अनुसार मौजूदा पूछताछ का उद्देश्य पहले से उपलब्ध बयानों की पुष्टि करना और विभिन्न दस्तावेजों के बीच संभावित विसंगतियों का परीक्षण करना है। ACB टेंडर प्रक्रिया, फाइलों में दर्ज अनुमोदनों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का आपस में मिलान कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हो सके।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह पड़ताल विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित है कि शराब खरीद, वितरण, अनुबंध प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों के दौरान कहीं ऐसी अनियमितताएं तो नहीं हुईं, जिनसे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा हो। इसी उद्देश्य से संबंधित अधिकारियों से दोबारा पूछताछ की जा रही है ताकि उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि की जा सके।

सूत्रों के अनुसार ACB विभिन्न विभागीय अभिलेखों, निविदा (टेंडर) दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और पूर्व में दर्ज बयानों का तुलनात्मक विश्लेषण कर रही है। यदि पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में किस स्तर पर क्या भूमिका निभाई गई और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमानुसार किया गया था।

जांच अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक अपराधों और सार्वजनिक खरीद से जुड़े मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए फाइलों में दर्ज टिप्पणियों, स्वीकृतियों, अनुबंधों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में दोबारा पूछताछ सामान्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा होती है। यदि किसी अधिकारी के पहले दिए गए बयान और बाद में मिले दस्तावेजों के बीच अंतर दिखाई देता है या नए साक्ष्य सामने आते हैं, तो जांच एजेंसी स्पष्टीकरण लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को फिर से बुला सकती है। इससे जांच को तथ्यात्मक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

फिलहाल ACB पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। एजेंसी का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, नियमों के उल्लंघन या आपराधिक साजिश के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और लोगों से पूछताछ या अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।

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