विसेंजा (इटली): इटली में विरासत और इतिहास के नाम पर की गई एक अनोखी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जहां एक व्यक्ति ने आधुनिक समय में बनाए गए एक नकली एम्फीथिएटर को प्राचीन रोमन धरोहर बताकर वर्षों तक पर्यटकों को भ्रमित किया। आरोपी फ्रैंको मालोस्सो वॉन रोजेनफ्रांज ने उत्तरी इटली के विसेंजा क्षेत्र में बने इस कथित “बेरिको मैरीटाइम एम्फीथिएटर” को हजारों साल पुराना ऐतिहासिक स्थल बताकर प्रचारित किया और पर्यटकों से गाइडेड टूर के नाम पर हजारों रुपये वसूले। अदालत ने मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए जेल की सजा सुनाई है।
जांच के अनुसार, मालोस्सो ने दावा किया था कि यह संरचना ईस्वी सन 393 के आसपास रोमन काल में बनाई गई थी और यह दुनिया के सबसे पुराने तथा महत्वपूर्ण प्राचीन थिएटरों में से एक है। उसने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई ऐतिहासिक दावे किए, जिनमें जूलियस सीजर और क्लियोपेट्रा जैसे प्रसिद्ध नामों का इस स्थान से संबंध होने की बात भी शामिल थी। आरोपी ने यहां तक प्रचार किया कि इस स्थल का संबंध शेक्सपियर के प्रसिद्ध पात्र जूलियट कैपुलेट की कहानी से भी जुड़ा हुआ है, जबकि जूलियट का संबंध पास के शहर वेरोना से माना जाता है।
कई वर्षों तक यह नकली स्थल वास्तविक पुरातात्विक खोज जैसा दिखाई देता रहा। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचे और करीब 35 पाउंड यानी लगभग ₹4,000 से अधिक का शुल्क देकर गाइडेड टूर में शामिल हुए। स्थानीय पर्यटन संस्थाओं ने भी इसकी जानकारी प्रचार सामग्री में शामिल की, जिससे लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ। यूरोपीय संघ द्वारा वित्त पोषित एक यात्रा गाइड में भी इसका उल्लेख आने के बाद इस फर्जी दावे को और विश्वसनीयता मिली।
हालांकि वर्ष 2016 के बाद इस स्थल को लेकर संदेह बढ़ने लगा। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों और पुरातत्व विशेषज्ञों ने जांच शुरू की। विशेषज्ञों की जांच में सामने आया कि जिसे प्राचीन रोमन खंडहर बताया जा रहा था, वह वास्तव में आधुनिक निर्माण था। जांच में पाया गया कि संरचना बनाने के लिए फाइबरग्लास, प्लास्टर, सीमेंट और पेपर-माचे जैसी आधुनिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया था।
जांचकर्ताओं ने सैटेलाइट तस्वीरों का भी विश्लेषण किया, जिनसे पता चला कि निर्माण शुरू करने से पहले पहाड़ी क्षेत्र को साफ किया गया था। विशेषज्ञों को वहां किसी वास्तविक रोमन सभ्यता या प्राचीन निर्माण के प्रमाण नहीं मिले। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि पूरे परिसर को हाल के वर्षों में बनाया गया और फिर कृत्रिम तरीके से पुराना दिखाने के लिए बदलाव किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर नकली ऐतिहासिक जानकारी, आकर्षक कहानियों और प्रचार के जरिए पर्यटकों तथा संस्थानों का भरोसा जीता। इस दौरान उसने इस स्थल को एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज के रूप में पेश किया और आर्थिक लाभ हासिल किया। मामले की जांच में यह भी सामने आया कि कई वर्षों तक स्थानीय स्तर पर इस दावे को चुनौती नहीं दी गई।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने फ्रैंको मालोस्सो को अवैध निर्माण, कला संबंधी धोखाधड़ी और बिना अनुमति संरचना तैयार करने के मामलों में दोषी पाया। अदालत ने उसे दो वर्ष चार महीने की जेल की सजा सुनाई और 3,000 यूरो यानी लगभग ₹3 लाख का जुर्माना लगाया। स्थानीय प्रशासन अब इस धोखाधड़ी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला हाल के वर्षों में सामने आए सबसे असामान्य पुरातात्विक धोखाधड़ी मामलों में शामिल है। ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के नाम पर होने वाली ठगी न केवल पर्यटकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि वास्तविक पुरातात्विक संरक्षण और इतिहास की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है।
फिलहाल यह मामला पूरे यूरोप में चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए पर्यटन स्थलों की प्रमाणिकता, ऐतिहासिक दावों और प्रचार सामग्री की वैज्ञानिक जांच को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
