तिरुवनंतपुरम: केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की एक महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं ने राज्य की भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को ऐसे प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि परीक्षा मूल्यांकन में कथित हेरफेर किसी व्यक्तिगत गलती का परिणाम नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से रैंक सूची प्रभावित करने की साजिश हो सकती है। जांच एजेंसी का मानना है कि पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव कर एक पसंदीदा उम्मीदवार को प्रथम स्थान दिलाने का प्रयास किया गया।
यह मामला केरल राज्य योजना बोर्ड में मुख्य (इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर) पद के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई विसंगतियों के बाद SIT ने इस मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद जांच टीम ने PSC मुख्यालय में व्यापक जांच अभियान चलाया, जिसमें कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल रिकॉर्ड, मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य आधिकारिक अभिलेखों की फोरेंसिक जांच भी कराई गई।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, जिस उम्मीदवार को अंततः प्रथम रैंक मिली, उसके द्वारा छोड़े गए 54 अंकों के प्रश्नों को कथित तौर पर मूल्यांकन प्रक्रिया से बाहर रखा गया। SIT का कहना है कि यदि निर्धारित नियमों के अनुसार सभी प्रश्नों का मूल्यांकन किया जाता, तो संबंधित उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट तक में स्थान नहीं बना पाता। इसी आधार पर जांच एजेंसी को संदेह है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में जानबूझकर हस्तक्षेप किया गया।
SIT के अनुसार, इस कथित हेरफेर का असर केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं रहा। कई अन्य अभ्यर्थियों के कुल अंकों में लगभग 50 अंकों तक की कमी दर्ज हुई, जिससे उनकी अंतिम रैंकिंग प्रभावित हुई। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर प्रथम स्थान पाने वाले उम्मीदवार और घोषित टॉपर के बीच लगभग 53 अंकों का अंतर था। इस खुलासे के बाद परीक्षा मूल्यांकन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
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जांच एजेंसी अब इस संभावना की भी पड़ताल कर रही है कि पूरी प्रक्रिया किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थी। SIT को आशंका है कि इसमें आयोग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बाहरी प्रभाव या दबाव की भी भूमिका हो सकती है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या किसी सार्वजनिक पदाधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया या किसी राजनीतिक अथवा अन्य प्रभाव के कारण भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ SIT कम से कम दो वरिष्ठ PSC अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति लेने की तैयारी कर रही है। चूंकि संबंधित अधिकारी लोक सेवक हैं, इसलिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की स्वीकृति आवश्यक होगी। फिलहाल दर्ज प्राथमिकी में आरोपियों के रूप में “केरल लोक सेवा आयोग के अधिकारी” का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसी भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा आपराधिक विश्वासघात, पद के दुरुपयोग तथा अन्य संभावित आपराधिक धाराओं के तहत भी मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ किए जाने की संभावना है। साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल लॉग, फाइल मूवमेंट और अधिकारियों के बीच हुए संचार का भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यदि SIT की जांच में मूल्यांकन में जानबूझकर की गई हेराफेरी और साजिश के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला केरल की हालिया सबसे गंभीर भर्ती परीक्षा अनियमितताओं में शामिल हो सकता है और राज्य की भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को भी तेज कर सकता है।
