नई दिल्ली: करोड़ों रुपये के कथित निवेश घोटाले में वांछित आरोपी राहुल शामराव कालोखे को फिजी से भारत वापस लाया गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने विदेश मंत्रालय (MEA), गृह मंत्रालय (MHA), महाराष्ट्र पुलिस और फिजी के अधिकारियों के समन्वय से इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर यह कार्रवाई पूरी की। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी लंबे समय से फरार था और निवेशकों से कथित धोखाधड़ी के बाद विदेश भाग गया था। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे गुरुवार को भारत लाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, राहुल शामराव कालोखे एक बड़े निवेश धोखाधड़ी मामले में वांछित था। जांच में आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर लोगों को अत्यधिक और सुनिश्चित रिटर्न का लालच देकर विभिन्न निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। आकर्षक मुनाफे के दावों के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने इन योजनाओं में अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि निवेशकों से बड़ी रकम जुटाने के बाद आरोपी और उसके सहयोगियों ने धन का दुरुपयोग किया तथा उसे निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया। जब मामले की शिकायतें बढ़ीं और जांच शुरू हुई तो आरोपी कथित तौर पर देश छोड़कर फरार हो गया, जिससे जांच और कानूनी कार्रवाई प्रभावित हुई।
महाराष्ट्र पुलिस के अनुरोध पर CBI ने इंटरपोल के माध्यम से आरोपी के खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया। रेड नोटिस जारी होने के बाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया गया। जांच के दौरान वह फिजी में मौजूद मिला, जहां स्थानीय अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया।
CBI के अनुसार, भारत सरकार और फिजी के संबंधित अधिकारियों के बीच कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को भारत भेजने की कार्रवाई शुरू की गई। CBI की एक विशेष एस्कॉर्ट टीम फिजी पहुंची और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को अपने साथ भारत लेकर लौटी। टीम 30 जुलाई को आरोपी के साथ भारत पहुंची, जहां अब उसे संबंधित जांच एजेंसी और अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान कथित निवेश नेटवर्क, धन के प्रवाह, अन्य सहयोगियों की भूमिका और निवेशकों से जुटाई गई राशि के उपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कथित ठगी से अर्जित धन को किन माध्यमों से स्थानांतरित या छिपाया गया।
CBI ने बताया कि भारत में इंटरपोल के राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (National Central Bureau) के रूप में वह सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ BHARATPOL प्लेटफॉर्म के जरिए समन्वय स्थापित करती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फरार अपराधियों का पता लगाने, रेड नोटिस जारी कराने, उनकी गिरफ्तारी और भारत वापसी की प्रक्रिया में यह समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अधिकारियों के अनुसार, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, CBI और विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से हाल के वर्षों में इंटरपोल चैनलों के माध्यम से 170 से अधिक वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। इन मामलों में प्रत्यर्पण, निर्वासन (Deportation) और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार आर्थिक अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इंटरपोल, विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों और भारतीय जांच संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के कारण विदेश भागने वाले आर्थिक अपराधियों की पहचान और उनकी भारत वापसी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से संभव हो रही है।
फिलहाल राहुल शामराव कालोखे से विस्तृत पूछताछ की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियां इस कथित निवेश घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों, वित्तीय लेनदेन, निवेशकों को हुए नुकसान और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी गहन जांच कर रही हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियां या अन्य कानूनी कार्रवाई होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
