स्टोरों में नकली सशस्त्र लूट की घटनाएं रचकर U Visa के लिए झूठे पीड़ित बनाने का आरोप; अदालत ने भारतीय नागरिक को दोषी ठहराते हुए अमेरिका से हटाने का दिया आदेश

फर्जी लूट दिखाकर अमेरिकी वीजा हासिल करने की साजिश का खुलासा: भारतीय नागरिक को जेल, जुर्माना और देश निकाले का आदेश

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By Roopa
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वॉशिंगटन: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने वीजा धोखाधड़ी के एक अनोखे और सुनियोजित मामले में भारतीय मूल के 40 वर्षीय मितुल पटेल को एक दिन की जेल, 1,000 अमेरिकी डॉलर के जुर्माने और अमेरिका से निष्कासन (रिमूवल) की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला उस मामले में दिया, जिसमें फर्जी सशस्त्र लूट की घटनाएं रचकर लोगों को अपराध का पीड़ित दिखाया जाता था, ताकि वे अमेरिकी U Visa के लिए झूठे दावे कर सकें।

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, मैसाचुसेट्स के वॉर्सेस्टर निवासी मितुल पटेल ने जून 2026 में इस मामले में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। वह उन 11 आरोपियों में शामिल था, जिन्होंने कथित तौर पर नकली लूट की घटनाओं के जरिए अमेरिकी आव्रजन प्रणाली को धोखा देने की साजिश में हिस्सा लिया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का संचालन रंभाई पटेल नामक व्यक्ति कर रहा था। आरोप है कि मार्च 2023 से उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों पर स्थित कम से कम छह सुविधा स्टोर, शराब की दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में नकली सशस्त्र लूट की घटनाओं की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया। इन घटनाओं का उद्देश्य वहां काम करने वाले कर्मचारियों को हिंसक अपराध का पीड़ित दिखाकर उनके लिए U Visa आवेदन को मजबूत बनाना था।

अमेरिकी कानून के तहत U Visa उन विदेशी नागरिकों को दिया जाता है जो कुछ विशेष प्रकार के गंभीर अपराधों के शिकार हुए हों, मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेली हो और अपराध की जांच या अभियोजन में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता की हो। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इसी प्रावधान का दुरुपयोग करने के लिए पूरी साजिश रची गई।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, मितुल पटेल ने अक्टूबर 2023 में वॉर्सेस्टर स्थित एक स्टोर में आयोजित नकली लूट की घटना में पीड़ित की भूमिका निभाने के लिए रंभाई पटेल को भुगतान किया था। योजना के तहत कथित लुटेरा हथियार जैसी दिखने वाली वस्तु दिखाकर कर्मचारियों को धमकाता, कैश काउंटर से नकदी लेकर भाग जाता और पूरी घटना स्टोर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होती थी।

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जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद स्टोर कर्मचारी तुरंत पुलिस को सूचना नहीं देते थे। वे कथित तौर पर कम से कम पांच मिनट तक इंतजार करते थे ताकि लुटेरा सुरक्षित निकल जाए और घटना वास्तविक प्रतीत हो। इसके बाद पुलिस को बुलाकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जाती थी, जिसका इस्तेमाल बाद में U Visa आवेदन में किया जाता था।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस साजिश में शामिल कथित पीड़ित रंभाई पटेल को भुगतान करते थे, जबकि वह स्टोर मालिकों को उनके प्रतिष्ठानों का इस्तेमाल करने के लिए पैसे देता था। इस तरह पूरी योजना आर्थिक लेनदेन और पूर्व नियोजित भूमिकाओं के आधार पर संचालित की जाती थी।

इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता रंभाई पटेल, कथित लुटेरे और फरार होने के लिए वाहन चलाने वाले बलविंदर सिंह के खिलाफ पहले ही मुकदमा चलाया जा चुका था। तीनों को मई 2025 में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आई, जिनमें मितुल पटेल भी शामिल था।

संघीय जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला अमेरिकी आव्रजन प्रणाली का दुरुपयोग करने की सुनियोजित कोशिश का उदाहरण है। जांच में जुटी एजेंसियों ने ऐसे मामलों में फर्जी पीड़ित तैयार करने, झूठे दस्तावेज और बनावटी घटनाओं के जरिए वीजा लाभ हासिल करने वाले नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की है।

अदालत के फैसले के बाद मितुल पटेल को एक दिन की कारावास की सजा, 1,000 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना और अमेरिका से निष्कासन का आदेश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य यह स्पष्ट संदेश देना है कि आव्रजन लाभ प्राप्त करने के लिए फर्जी अपराध, झूठे दावे या सुनियोजित धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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