मदुरै सिटी क्राइम ब्रांच ने मंदिर ट्रस्ट की भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण मामले में दर्ज की एफआईआर; फर्जी राजस्व रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी और गिरवी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति हड़पने का आरोप

मीनाक्षी मंदिर ट्रस्ट की जमीन हड़पने का आरोप: दो सब-रजिस्ट्रार समेत 19 पर केस दर्ज, फर्जी पट्टा और रजिस्ट्री की जांच तेज

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By Roopa
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मदुरै: तमिलनाडु के मदुरै में अरुलमिगु मीनाक्षी सुंदरेश्वरर मंदिर से जुड़े एक ट्रस्ट की जमीन के कथित फर्जी हस्तांतरण मामले में मदुरै सिटी क्राइम ब्रांच (सीसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कार्यरत सब-रजिस्ट्रार, दो पूर्व राजस्व अधिकारियों समेत 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट की जमीन का स्वामित्व राजस्व रिकॉर्ड से हटाकर निजी व्यक्तियों के नाम पट्टा जारी किया गया और बाद में न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति से जुड़े लेनदेन किए गए।

पुलिस के अनुसार, यह मामला मंदिर के संयुक्त आयुक्त द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सामने आया। शिकायत में कहा गया है कि 5 नवंबर 1930 को टी. एम. दुरैरानी द्वारा निष्पादित वसीयत के तहत पी. पी. कुलम (चोक्किकुलम) स्थित लगभग 0.72640 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली “असोधा विलास” नामक बंगला और उद्यान संपत्ति धार्मिक एवं परोपकारी उद्देश्यों के लिए मीनाक्षी मंदिर के अधीन पुदुकोट्टई राजकुमारर दक्षिणामूर्ति दुरैराजा दुरैरानी ट्रस्ट को दान की गई थी।

जांच के अनुसार, वर्ष 2016 में कथित तौर पर मंदिर के स्वामित्व का रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों से हटाकर निजी व्यक्तियों के पक्ष में पट्टा जारी कर दिया गया। आरोप है कि तत्कालीन मदुरै नॉर्थ तहसीलदार के स्तर पर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, जिसके बाद संबंधित संपत्ति के स्वामित्व में बदलाव का आधार तैयार हो गया।

हालांकि बाद में राजस्व मंडल अधिकारी ने उक्त पट्टा आदेश को निरस्त कर दिया और जिला राजस्व अधिकारी ने पूरे मामले की नए सिरे से जांच के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, मार्च 2021 में मद्रास उच्च न्यायालय ने विवादित पट्टा हस्तांतरण के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी। इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने लंबित न्यायिक कार्यवाही की जानकारी छिपाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखी।

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पुलिस का आरोप है कि 16 अप्रैल 2021 को तूतीकोरिन जिले के मुरप्पनाडु सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में कथित तौर पर एक सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) निष्पादित की गई। इसके बाद उसी दस्तावेज के आधार पर 19 जुलाई 2021 को डिंडीगुल जिले के वडामदुरै सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में तीन व्यक्तियों के पक्ष में बंधक (मॉर्गेज) दस्तावेज का पंजीकरण भी कराया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन दस्तावेजों के माध्यम से विवादित मंदिर भूमि पर निजी अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया गया।

एफआईआर में पूर्व ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ) अरासन, मदुरै नॉर्थ के पूर्व तहसीलदार अंबालागन, मुरप्पनाडु के सब-रजिस्ट्रार ए. अनंतरामन, वडामदुरै के सब-रजिस्ट्रार प्रशांत संथाना करुप्पन सहित कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि भूमि रिकॉर्ड और संपत्ति पंजीकरण प्रणाली में फर्जी दस्तावेजों के जरिए की जाने वाली धोखाधड़ी सार्वजनिक और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण, राजस्व रिकॉर्ड का नियमित ऑडिट, पंजीकरण प्रक्रिया का बहु-स्तरीय सत्यापन और न्यायालय में लंबित मामलों का ऑनलाइन एकीकरण ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।

पुलिस ने बताया कि मामले में राजस्व अभिलेखों, पंजीकरण दस्तावेजों, न्यायालयी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित फर्जीवाड़ा किसी संगठित नेटवर्क के तहत किया गया था या इसमें अन्य व्यक्तियों की भी भूमिका रही। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।

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