सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक जानकारी की दो घंटे के भीतर तथ्यात्मक काट जारी करने के निर्देश दिए; प्लेटफॉर्म आधारित कंटेंट रणनीति अपनाने पर जोर

फेक न्यूज पर दो घंटे में जवाब देने का निर्देश: सभी मंत्रालयों में क्विक रिस्पॉन्स टीम बनेगी, रियल टाइम निगरानी के आदेश

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By Roopa
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नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। इन टीमों का दायित्व सोशल मीडिया पर रियल टाइम में फर्जी या भ्रामक सामग्री की पहचान करना और उसके सामने आने के दो घंटे के भीतर आधिकारिक एवं तथ्यात्मक जवाब जारी करना होगा। यह कदम हाल के महीनों में नीट पेपर लीक विवाद सहित कई मामलों में सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक सूचनाओं के बाद उठाया गया है।

सूचना एवं प्रसारण (आई एंड बी) मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, प्रत्येक मंत्रालय और विभाग को तत्काल प्रभाव से समर्पित क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित करनी होगी। इन टीमों को सरकारी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों से संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी कर गलत दावों और अफवाहों की पहचान करनी होगी तथा आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से उनका तथ्यात्मक खंडन प्रकाशित करना होगा। मंत्रालय का मानना है कि गलत जानकारी को शुरुआती चरण में ही चुनौती देना उसके व्यापक प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक है।

मंत्रालय द्वारा सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को भेजे गए पत्र में सूचना एवं प्रसारण सचिव चंचल कुमार ने कहा है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें और भ्रामक सूचनाएं अत्यंत तेजी से फैलती हैं, इसलिए सरकारी प्रतिक्रिया भी उसी गति से आनी चाहिए। पत्र में कहा गया है कि यदि गलत जानकारी का समय पर खंडन नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में लोग भ्रमित हो सकते हैं।

निर्देशों के अनुसार, किसी भी भ्रामक पोस्ट या फर्जी दावे की पहचान होने के दो घंटे के भीतर संबंधित मंत्रालय को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी करना होगा। प्रत्येक प्रतिक्रिया अधिकतम 200 शब्दों तक सीमित होगी और उसमें केवल सत्यापित एवं सटीक जानकारी ही शामिल की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि संक्षिप्त, स्पष्ट और समयबद्ध प्रतिक्रिया वायरल गलत सूचनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकती है।

सरकार ने मंत्रालयों को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अनुरूप सामग्री तैयार करने की भी सलाह दी है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म के लिए पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स, मीम्स, शॉर्ट वीडियो और अन्य दृश्य सामग्री का उपयोग करने पर जोर दिया गया है, ताकि आधिकारिक जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उसकी दृश्यता बढ़ सके।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी क्विक रिस्पॉन्स टीमों का गठन तत्काल किया जाए तथा उनके सदस्यों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को दो घंटे की प्रतिक्रिया समयसीमा, फर्जी सूचनाओं की पहचान, तथ्य सत्यापन और प्रभावी डिजिटल संचार की प्रक्रिया से अवगत कराया जाएगा। मंत्रालय ने आवश्यकता पड़ने पर सभी विभागों को तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग देने का भी आश्वासन दिया है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों, सरकारी अधिकारियों, सांसदों, विधायकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से भारत की ई-20 एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति का सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा है। निर्देशों के अनुसार एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग वीडियो तैयार कर व्यापक स्तर पर साझा किए जाएंगे। यह अभियान ऐसे समय शुरू किया गया है जब ई-20 नीति के क्रियान्वयन को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें और विपक्ष की आलोचना सामने आ रही हैं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर फर्जी सूचनाएं कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकती हैं, इसलिए सरकारी संस्थानों की त्वरित और तथ्य आधारित प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार रियल टाइम निगरानी, प्रभावी फैक्ट-चेकिंग, समन्वित डिजिटल संचार और जन-जागरूकता अभियान फेक न्यूज के प्रभाव को कम करने तथा आधिकारिक सूचनाओं पर लोगों का विश्वास मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसा तेज, समन्वित और तकनीक आधारित तंत्र विकसित करना है जो किसी भी भ्रामक सूचना को व्यापक रूप से फैलने से पहले ही तथ्यात्मक रूप से चुनौती दे सके। सरकार का मानना है कि इससे विभिन्न मंत्रालयों के बीच आधिकारिक संचार व्यवस्था मजबूत होगी और नागरिकों तक समय पर सटीक तथा सत्यापित जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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