रांची: वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए सुरक्षा बलों ने देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल और ₹1 करोड़ से अधिक के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। झारखंड पुलिस, कोबरा (CoBRA) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया बेसरा प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य है और उसे सारंडा तथा कोल्हान के जंगलों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। इस अभियान में उसके दो करीबी सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिससे पूर्वी भारत में सक्रिय माओवादी संगठन को बड़ा झटका माना जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विशेष खुफिया सूचना के आधार पर मंगलवार देर रात गिरिडीह जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के मनियाडीह इलाके में अभियान चलाया गया। इसी दौरान मिसिर बेसरा को दबोच लिया गया। उसके साथ क्षेत्रीय समिति सदस्य मेहनत उर्फ मोच्छू, जिस पर ₹5 लाख का इनाम घोषित था, तथा गौरव उर्फ सौरव को भी गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई लंबे समय तक चली निगरानी, खुफिया इनपुट और रणनीतिक योजना के बाद अंजाम दी गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, झारखंड सरकार ने मिसिर बेसरा पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित किया था, जबकि ओडिशा सरकार ने उस पर ₹1.20 करोड़ का अलग इनाम रखा हुआ था। वह लगभग दो दशकों से फरार चल रहा था और देश के सबसे सक्रिय तथा वांछित माओवादी नेताओं में गिना जाता था। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद झारखंड में ₹1 करोड़ के इनाम वाला केवल एक प्रमुख माओवादी नेता असीम मंडल ही फरार है।
सुरक्षा अधिकारियों ने इस गिरफ्तारी को सारंडा, कोल्हान और आसपास के वन क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका बताया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि बेसरा संगठन के सशस्त्र अभियानों, भर्ती, प्रशिक्षण और रसद व्यवस्था में अहम भूमिका निभाता था। उसकी गिरफ्तारी से इन इलाकों में माओवादी गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
गिरफ्तार तीनों माओवादियों को एक अज्ञात स्थान पर ले जाकर झारखंड पुलिस, खुफिया ब्यूरो (आईबी) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से पूछताछ कर रही हैं। जांच का मुख्य फोकस जंगलों में छिपाए गए अत्याधुनिक हथियारों, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), भूमिगत ठिकानों तथा संगठन को वित्तीय, रसद और संचार सहायता देने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) की पहचान करना है।
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अधिकारियों के मुताबिक, हाल के महीनों में सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के कारण माओवादी संगठन पर दबाव बढ़ गया था। खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा और उसका दस्ता नया सुरक्षित ठिकाना तलाशने के लिए गिरिडीह और पारसनाथ पहाड़ियों की ओर बढ़ रहा है। इसी सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन सुदर्शन’ शुरू किया, संभावित मार्गों की घेराबंदी की और व्यापक तलाशी अभियान चलाकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हत्या, सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन सहित 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियां उस पर वर्ष 2003-04 में पश्चिमी सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलीबा क्षेत्रों में हुए आईईडी विस्फोटों की साजिश रचने का भी आरोप लगाती हैं, जिनमें 55 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी। वह वर्ष 2009 से फरार था, जब बिहार के लखीसराय अदालत परिसर पर माओवादी हमले के दौरान उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, मिसिर बेसरा तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रहता था और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था, जिसके कारण उसकी गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई थी। प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि किसी भी उग्रवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं होती, बल्कि उससे संगठन की कमान, संचार तंत्र, वित्तीय नेटवर्क और रसद व्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण से सुरक्षा एजेंसियां संगठन के शेष नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब जांच का अगला चरण मिसिर बेसरा के पूरे समर्थन तंत्र को ध्वस्त करने, उसके वित्तीय स्रोतों का पता लगाने, स्थानीय सहयोगियों की पहचान करने तथा छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी पर केंद्रित रहेगा। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से मिली जानकारी भविष्य में माओवादी गतिविधियों को रोकने, अन्य वांछित नेताओं तक पहुंचने और चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
