सारंगढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में ‘नारी सम्मान निधि योजना’ के नाम पर कथित तौर पर सरकारी योजना का झूठा प्रचार कर ₹2.38 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल अजय लक्ष्मै को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। जांच के अनुसार, आरोपियों ने ग्रामीण महिलाओं और अन्य लोगों को यह विश्वास दिलाया कि योजना सरकार द्वारा संचालित है, जिसमें निवेश की गई राशि 20 महीने में दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही हर महीने जमा राशि पर 10 प्रतिशत अनुदान मिलने और ऋण लेकर निवेश करने वालों की किस्त संस्था द्वारा जमा किए जाने का भी दावा किया गया। इन झूठे वादों के आधार पर आसपास के कई गांवों से कुल ₹2,38,22,260 की राशि एकत्र कर ली गई।
मामले का खुलासा तब हुआ जब मोतिन यादव समेत कई ग्रामीण महिलाओं और अन्य निवेशकों ने सारंगढ़ सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, अजय लक्ष्मै, दिनेश बंजारे, उत्तम बाई बंजारे और उनके अन्य सहयोगी खुद को ‘छग युवा समाज सुधार समिति’ का सदस्य बताकर गांव-गांव पहुंचते थे। आरोपी लोगों को बताते थे कि ‘नारी सम्मान निधि योजना’ सरकार की विशेष योजना है, जिसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और निर्धारित अवधि पूरी होने पर राशि दोगुनी कर दी जाएगी।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निवेशकों को यह भी भरोसा दिलाया गया कि जमा राशि पर हर महीने 10 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति ऋण लेकर इस योजना में पैसा लगाएगा तो उसकी मासिक किस्त भी संस्था स्वयं जमा करेगी। इन आकर्षक दावों के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं, किसानों और अन्य लोगों ने अपनी जमा पूंजी इस योजना में निवेश कर दी।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने आसपास के कई गांवों के लोगों से कुल ₹2.38 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई। जब तय समय पर निवेशकों को न तो रकम वापस मिली और न ही वादा किया गया लाभ, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद कई पीड़ितों ने एक साथ पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
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शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने 23 जुलाई 2026 को सारंगढ़ थाने में अपराध क्रमांक 351/2026 दर्ज किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामला दर्ज होते ही पुलिस ने मुख्य आरोपी अजय लक्ष्मै को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच के दौरान आरोपी ने कथित धोखाधड़ी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक और लेनदेन से संबंधित एक रजिस्टर बरामद किया गया, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया है। इन दस्तावेजों के आधार पर अब धन के लेनदेन और निवेशकों से जुटाई गई राशि के उपयोग की विस्तृत जांच की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में नामजद अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कथित योजना का संचालन किन-किन क्षेत्रों में किया गया और इसमें कितने लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियां अब निवेशकों की वास्तविक संख्या, ठगी की कुल रकम और धन के प्रवाह का विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी सरकारी मान्यता और वैधता की पुष्टि अवश्य करें। कम समय में रकम दोगुनी होने, भारी अनुदान या असामान्य मुनाफे का दावा करने वाली योजनाओं से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यदि कोई व्यक्ति सरकारी योजना का नाम लेकर निवेश के लिए दबाव बनाता है या अवास्तविक लाभ का वादा करता है तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है, ताकि इस तरह की वित्तीय धोखाधड़ी पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
