भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रतिष्ठित टाटा समूह की कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप और फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर ₹15.19 लाख की कथित ठगी करने के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने बिहार के सारण जिले से एक 50 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसके साथियों ने खुद को टाटा पावर सोलर सिस्टम्स लिमिटेड और टाटा 1एमजी हेल्थ केयर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर पीड़ित को भरोसे में लिया और अलग-अलग मदों में कई किश्तों में भुगतान करवा लिया। जब वादा की गई डिस्ट्रीब्यूटरशिप और फ्रेंचाइजी नहीं मिली, तब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उसने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान बिहार के सारण जिले के निवासी दधिबल कुमार सिंह के रूप में हुई है। उसे साइबर क्राइम थाना केस संख्या 43, दिनांक 26 मार्च 2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जबकि उसके अन्य साथियों और पूरे नेटवर्क की तलाश जारी है।
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शिकायतकर्ता बिजन कुमार महापात्रा ने पुलिस को बताया कि उनसे संपर्क करने वाले लोगों ने खुद को टाटा पावर सोलर सिस्टम्स लिमिटेड और टाटा 1एमजी के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत किया। जांच के अनुसार, आरोपियों ने पहले ईमेल के माध्यम से संपर्क किया और बाद में व्हाट्सएप पर बातचीत जारी रखते हुए प्रतिष्ठित कंपनियों की डिस्ट्रीब्यूटरशिप और फ्रेंचाइजी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। पेशेवर अंदाज में तैयार किए गए संदेशों और दस्तावेजों के जरिए पीड़ित का विश्वास जीतने की कोशिश की गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पंजीकरण शुल्क, एग्रीमेंट प्रोसेसिंग फीस, शुरुआती स्टॉक खरीद, अतिरिक्त स्टॉक और टीडीएस भुगतान जैसे विभिन्न बहानों से चरणबद्ध तरीके से रकम जमा कराने के लिए कहा। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह अलग-अलग मदों में भुगतान मांगकर पूरी प्रक्रिया को वास्तविक व्यावसायिक स्वीकृति जैसा दिखाया गया, ताकि पीड़ित को किसी प्रकार का संदेह न हो।
विश्वास में आकर शिकायतकर्ता ने अपनी पत्नी के बैंक खाते से एनईएफटी (NEFT) के माध्यम से आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। पुलिस के अनुसार, कथित टाटा पावर सोलर डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए ₹10.97 लाख और टाटा 1एमजी फ्रेंचाइजी के नाम पर ₹4.21 लाख का भुगतान किया गया। इस प्रकार कुल ₹15,19,200 आरोपियों के खातों में भेजे गए। इसके बावजूद न तो कोई डिस्ट्रीब्यूटरशिप दी गई और न ही फ्रेंचाइजी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध कराया गया।
जब लंबे समय तक कोई व्यावसायिक स्वीकृति नहीं मिली और कथित प्रतिनिधियों का व्यवहार संदिग्ध लगने लगा, तब पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया। जांच के दौरान पुलिस ने बैंकिंग लेनदेन, ईमेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया। मनी ट्रेल के आधार पर जांच बिहार तक पहुंची, जहां से दधिबल कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस कथित गिरोह ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की फर्जी फ्रेंचाइजी योजनाओं के जरिए लोगों को निशाना बनाया या नहीं।
जांच एजेंसियां ईमेल, मोबाइल उपकरणों, बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और सभी लाभार्थियों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर ठग अब प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम, फर्जी ईमेल, नकली वेबसाइट, जाली दस्तावेज और पेशेवर संचार का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। उनके अनुसार, डिजिटल फॉरेंसिक, बैंकिंग रिकॉर्ड, ईमेल ट्रेल, भुगतान विवरण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वैज्ञानिक विश्लेषण ऐसे मामलों में पूरे गिरोह तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी फ्रेंचाइजी या डिस्ट्रीब्यूटरशिप में निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत प्रतिनिधियों से उसकी पुष्टि अवश्य करें। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और मनी ट्रेल के साथ पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
