अमेरिकी सांसदों की रिपोर्ट में AI से बढ़ते वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए बैंकों और एजेंसियों में AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।

AI से बढ़ते वित्तीय अपराधों पर अमेरिकी सांसदों की चिंता: धोखाधड़ी रोकने के लिए बैंकों और एजेंसियों में AI के व्यापक इस्तेमाल की सिफारिश

Team The420
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका में वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से विस्तार के बीच अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की वित्तीय सेवा समिति (House Financial Services Committee) के रिपब्लिकन सदस्यों ने AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन तकनीकों के व्यापक उपयोग की सिफारिश की है। एक वर्ष तक चली समिति की जांच और कई सार्वजनिक सुनवाई के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार, वित्तीय संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को AI का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय अपराधों का मुकाबला किया जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, AI ने वित्तीय अपराधों की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। अपराधी अब AI की मदद से अत्यंत विश्वसनीय ईमेल, संदेश और फर्जी संचार तैयार कर रहे हैं, जो पीड़ितों की व्यक्तिगत जानकारी के अनुरूप होते हैं। इसके अलावा, वॉयस क्लोनिंग तकनीक का उपयोग कर परिवार के सदस्यों या परिचितों की आवाज की नकल कर ठगी की जा रही है, जबकि डीपफेक वीडियो के जरिए कॉरपोरेट कंपनियों में फर्जी वित्तीय लेनदेन तक को मंजूरी दिलाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

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समिति के अध्यक्ष फ्रेंच हिल ने रिपोर्ट के साथ जारी बयान में कहा कि जैसे-जैसे अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर अधिक परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं, वैसे-वैसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नियामकों और वित्तीय संस्थानों को भी आधुनिक तकनीकी उपकरणों से लैस करना आवश्यक है। उनके अनुसार, वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने की रणनीति को अपराधियों की बदलती कार्यप्रणाली के अनुरूप विकसित करना समय की मांग है।

रिपोर्ट में अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान अमेरिकी उपभोक्ताओं ने वित्तीय धोखाधड़ी के कारण 15.9 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान दर्ज कराया। समिति का मानना है कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि साइबर ठगी और वित्तीय अपराध अब पहले की तुलना में कहीं अधिक संगठित, तकनीक-आधारित और व्यापक हो चुके हैं।

हालांकि रिपोर्ट AI को केवल जोखिम के रूप में नहीं देखती। इसमें कहा गया है कि यदि यही तकनीक वित्तीय संस्थानों, बैंकों और सरकारी एजेंसियों द्वारा अपनाई जाए तो संदिग्ध लेनदेन की पहचान, असामान्य गतिविधियों का विश्लेषण, वास्तविक समय में जोखिम मूल्यांकन तथा संभावित धोखाधड़ी को रोकने में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि अपराधियों के पास मौजूद तकनीकी बढ़त को समाप्त करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को समान स्तर की AI क्षमताओं से लैस किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में अमेरिकी सरकारी एजेंसियों द्वारा AI के सफल उपयोग का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि Centers for Medicare and Medicaid Services (CMS) ने AI आधारित विश्लेषण प्रणाली के माध्यम से अपव्यय, धोखाधड़ी और अनुचित भुगतान की पहचान कर 2 अरब डॉलर से अधिक के गलत भुगतान को रोका। समिति ने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि AI आधारित निगरानी प्रणाली वित्तीय अनियमितताओं को शुरुआती स्तर पर पकड़ने में प्रभावी साबित हो सकती है।

साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI के व्यापक उपयोग के साथ मजबूत निगरानी और मूल्यांकन तंत्र विकसित करना आवश्यक होगा। समिति ने सुझाव दिया कि कांग्रेस और संघीय नियामक एजेंसियां AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम की प्रभावशीलता, उनकी सीमाओं और उनके उपयोग में आने वाली नियामकीय बाधाओं का विस्तृत अध्ययन करें ताकि भविष्य की नीतियां अधिक प्रभावी बनाई जा सकें।

रिपोर्ट में दो महत्वपूर्ण द्विदलीय विधेयकों को शीघ्र पारित करने की भी सिफारिश की गई है। इनमें Bank Fraud Technology Advancement Act शामिल है, जिसके तहत बैंकिंग एजेंसियों को उन्नत तकनीकों के उपयोग का अध्ययन करने और छोटे सामुदायिक बैंकों के लिए AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन पायलट कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव है। दूसरा Artificial Intelligence Practices, Logistics, Actions and Necessities (AI PLAN) Act है, जिसके माध्यम से होमलैंड सिक्योरिटी, वाणिज्य और ट्रेजरी विभागों को AI आधारित वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समन्वित राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया जाएगा।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि AI अब दोधारी तलवार बन चुका है। एक ओर अपराधी डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और स्वचालित सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर अधिक परिष्कृत साइबर ठगी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर AI आधारित फ्रॉड एनालिटिक्स, व्यवहार विश्लेषण, रियल-टाइम ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग और डिजिटल फॉरेंसिक टूल वित्तीय संस्थानों को संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान करने में सक्षम बना रहे हैं। उनके अनुसार, AI का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग, मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे तथा संस्थागत सहयोग के साथ ही वित्तीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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