गरीब लोगों के आधार कार्ड में फर्जी पता दर्ज कर खुलवाए जाते थे बैंक खाते; डाकिया और आधार ऑपरेटर की कथित भूमिका की जांच, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क पुलिस के रडार पर

फर्जी बैंक खातों से ₹76.44 लाख की साइबर ठगी: महिला सरगना समेत छह गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
5 Min Read

वाराणसी (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सिगरा पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए महिला सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनके आधार कार्ड में फर्जी पता दर्ज कराता था और उसी पते के आधार पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए किया जाता था। पुलिस का दावा है कि बरामद बैंक खातों, चेकबुक और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से अब तक लगभग ₹76.44 लाख की साइबर ठगी की जा चुकी है। मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज शिकायतों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार गिरोह की कथित सरगना आरती कुमारी, सोनभद्र जिले के दुद्धी क्षेत्र की रहने वाली है। उसके साथ मालती देवी, उमंग कुमार, शोभनाथ, जितेंद्र कन्नौजिया और अनिल कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं और सभी मिलकर बैंक खाते तैयार करने, दस्तावेज जुटाने तथा साइबर अपराधियों तक बैंकिंग संसाधन पहुंचाने का काम करते थे। पुलिस आरोपियों के आपसी संपर्क, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को धन का प्रलोभन देकर उनके आधार कार्ड में वाराणसी के सिगरा क्षेत्र का कथित फर्जी पता दर्ज कराता था। इसके बाद इसी पते पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। आरोप है कि गिरोह में शामिल डाकिया शोभनाथ बैंक की चेकबुक और डेबिट कार्ड जैसी बैंक किट संबंधित पते पर पहुंचने से पहले ही हासिल कर लेता था। बाद में इन्हें मोबाइल सिम के साथ पैक कर कथित मुख्य साइबर अपराधियों तक कूरियर के जरिए भेज दिया जाता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों की चेकबुक, डेबिट कार्ड, 11 पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इन बैंक खातों का उपयोग कर्नाटक, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, असम, मणिपुर सहित कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों में किया गया। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क के खिलाफ देशभर में 21 मुकदमे दर्ज हैं। अकेले कर्नाटक में इन खातों के जरिए ₹35.50 लाख से अधिक की साइबर ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि धन के प्रवाह और लाभार्थियों की पहचान के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय किया जा रहा है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अब फर्जी या किराये के बैंक खातों और म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी की रकम को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि आधार, बैंक खाता या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। नागरिकों को किसी भी लालच में आकर अपने पहचान दस्तावेज या बैंकिंग सुविधाएं किसी दूसरे के उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं करानी चाहिए।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस, आधार संशोधन से जुड़े दस्तावेज और कूरियर रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह के संपर्क किन-किन राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से थे और साइबर ठगी से प्राप्त धन किन खातों में स्थानांतरित किया गया। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या संगठित साइबर नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, आधार कार्ड और मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस और संबंधित बैंक को दें।

हमसे जुड़ें

Share This Article