फर्जी बैंक खातों, शेल कंपनियों और अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों पर कसेगा शिकंजा; जांच एजेंसियों, बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच समन्वय बढ़ाने की तैयारी

इंदिरम्मा हाउसिंग योजना के नाम पर साइबर ठगी का खतरा: हैदराबाद पुलिस ने जारी की चेतावनी, फर्जी लिंक और APK फाइलों से सतर्क रहने की सलाह

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद: तेलंगाना सरकार की इंदिरम्मा हाउसिंग योजना के लाभार्थियों के लिए ₹10,000 की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा करने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही हैदराबाद पुलिस ने संभावित साइबर ठगी को लेकर व्यापक चेतावनी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि योजना के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, नकली वेबसाइट और सोशल मीडिया संदेशों से सावधान रहें। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी सरकारी योजनाओं के दौरान लोगों की जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर बैंक खातों और व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच बनाने का प्रयास करते हैं।

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इंदिरम्मा हाउसिंग योजना की चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी भी प्रकार के बिचौलिए, एजेंट या दलाल की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी लाभार्थी को मकान आवंटित नहीं होता है तो जमा की गई ईएमडी राशि सरकार द्वारा सीधे उसी बैंक खाते में वापस कर दी जाएगी, जिससे भुगतान किया गया था। ऐसे में किसी व्यक्ति के यह कहने पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि अतिरिक्त पैसा देने पर निश्चित रूप से मकान आवंटित करा दिया जाएगा।

पुलिस ने कहा कि साइबर ठग अक्सर लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में भुगतान करवाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे फोन कॉल या संदेश भेजकर दावा कर सकते हैं कि “आज अंतिम तिथि है”, “अभी भुगतान नहीं किया तो आपका आवेदन रद्द हो जाएगा” या “तुरंत कार्रवाई नहीं की तो मकान नहीं मिलेगा”। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की बातें लोगों को डराकर धोखाधड़ी करने की सामान्य रणनीति होती हैं।

साइबर अपराधियों द्वारा व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों पर भेजे जाने वाले अज्ञात लिंक भी बड़ा खतरा बताए गए हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि उनमें APK फाइलें हो सकती हैं। ऐसी फाइलें मोबाइल फोन में इंस्टॉल होने के बाद डिवाइस का नियंत्रण अपराधियों तक पहुंचा सकती हैं, जिससे बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

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अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि ठग सरकारी वेबसाइटों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार कर सकते हैं, जहां लोगों से आवेदन सत्यापन, भुगतान या बैंक विवरण अपडेट करने के नाम पर व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है। इसलिए लाभार्थियों को केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल और अधिकृत माध्यमों का ही उपयोग करना चाहिए तथा किसी भी वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचने के बाद ही उस पर जानकारी दर्ज करनी चाहिए।

पुलिस के अनुसार कुछ साइबर अपराधी सहायता या मार्गदर्शन देने के बहाने लोगों को AnyDesk, TeamViewer या अन्य स्क्रीन-शेयरिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए भी कह सकते हैं। एक बार ये ऐप इंस्टॉल होने के बाद अपराधी दूर से मोबाइल स्क्रीन देख सकते हैं और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया के लिए ऐसे ऐप डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती।

लाभार्थियों को यह भी याद दिलाया गया कि UPI PIN केवल भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने या रिफंड लेने के लिए कभी भी UPI PIN दर्ज करने की जरूरत नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति रिफंड, सत्यापन या सरकारी भुगतान के नाम पर UPI PIN मांगता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं के दौरान साइबर अपराधी लोगों के भरोसे और जल्दबाजी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी भुगतान या दस्तावेज साझा करने से पहले केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ आधार कार्ड की फोटो, बैंक विवरण, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता लोगों को बड़ी आर्थिक हानि से बचा सकती है।

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