ऑस्ट्रेलिया से भेजी गई ईमेल शिकायत पर अमरेली साइबर क्राइम टीम ने शुरू की जांच; बैंक समन्वय और लगातार कार्रवाई के बाद जुलाई में पीड़ित के खाते में लौटे पूरे ₹11 लाख, विदेश में रह रहे भारतीय ने पुलिस की सराहना की

सिडनी में बैठे NRI को गोल्ड डील में ₹11 लाख की ठगी, गुजरात पुलिस ने ईमेल शिकायत पर पूरी रकम कराई वापस

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By Roopa
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अमरेली (गुजरात): ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाले भारतीय मूल के एक व्यक्ति के साथ गोल्ड खरीद के नाम पर हुई ₹11 लाख की धोखाधड़ी के मामले में गुजरात पुलिस की अमरेली साइबर क्राइम टीम ने पूरी रकम वापस दिलाकर एक उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। विदेश में होने के कारण भारत नहीं आ पाने वाले पीड़ित ने ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की, संबंधित बैंक के साथ समन्वय स्थापित किया और लगातार कार्रवाई करते हुए पूरी राशि वापस दिला दी।

मामला नई दिल्ली मूल के सौरभ जॉली का है, जो वर्तमान में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में अमरेली निवासी एक व्यक्ति को सोना खरीदने के लिए ₹11 लाख ट्रांसफर किए थे। आरोप है कि भुगतान मिलने के बावजूद न तो सोना उपलब्ध कराया गया और न ही रकम लौटाई गई। काफी प्रयासों के बाद भी समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने जून 2026 में अमरेली पुलिस को ईमेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई।

विदेश में रहने के कारण पीड़ित के लिए व्यक्तिगत रूप से भारत आकर शिकायत करना संभव नहीं था। इसके बावजूद अमरेली साइबर क्राइम टीम ने शिकायत को गंभीरता से लिया और बिना किसी देरी के जांच शुरू कर दी। पुलिस ने पीड़ित को आश्वस्त किया कि उसकी अनुपस्थिति जांच में बाधा नहीं बनेगी और मामले का कानूनी तरीके से समाधान कराया जाएगा।

जांच के दौरान साइबर क्राइम टीम ने धनराशि प्राप्त करने वाले व्यक्ति की पहचान की और संबंधित बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर लेनदेन का सत्यापन किया। इसके बाद पुलिस ने संबंधित व्यक्ति से लगातार संपर्क बनाए रखा और उसे रकम वापस करने के लिए कहा। पुलिस की कार्रवाई और लगातार फॉलो-अप के बाद आरोपी ने जुलाई 2026 में पूरे ₹11 लाख लौटा दिए। इसके बाद यह राशि पीड़ित के बैंक खाते में जमा करा दी गई।

राशि वापस मिलने के बाद सौरभ जॉली ने अमरेली पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जांच के दौरान पुलिस लगातार उनसे संपर्क में रही, प्रत्येक चरण की जानकारी देती रही और उनकी सभी शंकाओं का धैर्यपूर्वक समाधान किया।

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अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि अमरेली साइबर क्राइम टीम की सक्रियता और पेशेवर कार्यशैली ने उनका विश्वास और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि समय पर की गई पुलिस कार्रवाई न केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई कर सकती है, बल्कि साइबर अपराध से पीड़ित लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ाती है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन लेनदेन, विशेष रूप से सोना, कीमती धातुओं या अन्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों की खरीद के दौरान विक्रेता की पहचान, लाइसेंस, प्रतिष्ठा और भुगतान प्रक्रिया का सावधानीपूर्वक सत्यापन करना आवश्यक है। केवल अग्रिम भुगतान के आधार पर किसी भी बड़े सौदे को अंतिम रूप देना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

Future Crime Research Foundation से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऑनलाइन भुगतान के बाद सामान की डिलीवरी नहीं होती या विक्रेता संपर्क से बचने लगे, तो पीड़ित को तुरंत बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचित करना चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज होने पर बैंकिंग समन्वय और डिजिटल ट्रेल के आधार पर धनराशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब गुजरात सरकार साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने और ठगी की रकम वापस दिलाने पर विशेष जोर दे रही है। हाल के महीनों में राज्य पुलिस को साइबर शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने, पीड़ितों से नियमित संवाद बनाए रखने और उपलब्ध कानूनी एवं बैंकिंग प्रक्रियाओं का उपयोग कर अधिकतम धनराशि रिकवर करने के निर्देश दिए गए हैं। अमरेली साइबर क्राइम टीम की इस कार्रवाई को उसी प्रयास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसने विदेश में रह रहे एक भारतीय नागरिक को राहत दिलाने के साथ-साथ साइबर अपराध से निपटने में पुलिस की प्रभावी भूमिका को भी रेखांकित किया।

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