जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में एटीएम मशीन को तकनीकी तरीके से हैंग कर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को पुलिस ने पांच साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। वर्ष 2021 में दर्ज इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी अब्बास खान को जैसलमेर जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के जरिए न केवल इस वारदात से जुड़े अन्य फरार आरोपियों का पता लगाया जा रहा है, बल्कि पूरे ठगी नेटवर्क और उससे जुड़ी अन्य घटनाओं की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। सिंधी कैंप थाना पुलिस ने अब्बास खान को उस समय गिरफ्तार किया जब वह एक अन्य मामले में जैसलमेर जेल में बंद था। अदालत से प्रोडक्शन वारंट प्राप्त करने के बाद उसे जयपुर लाकर पूछताछ शुरू की गई है।
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2021 में सिंधी कैंप बस स्टैंड के पास स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एटीएम को तकनीकी तरीके से हैंग कर गिरोह ने करीब ₹4.50 लाख की ठगी को अंजाम दिया था। आरोप है कि एटीएम की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप कर मशीन को इस तरह प्रभावित किया गया कि नकदी निकाली जा सके, जबकि लेनदेन की प्रक्रिया सामान्य रूप से दर्ज नहीं हो सकी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक न्यास भंग से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पहले ही गिरोह के चार अन्य सदस्यों—तारीक हुसैन, एजाज खान, मोहम्मद आसिफ और मोसिम खान—को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि अब्बास खान लगातार फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश में विभिन्न राज्यों में दबिश दे रही थी और उसके संभावित ठिकानों की लगातार निगरानी की जा रही थी। आखिरकार उसके जैसलमेर जेल में होने की जानकारी मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
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गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय अब्बास खान पुत्र इलियास खान के रूप में हुई है। वह राजस्थान के डीग जिले के खोह थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव का निवासी है। पुलिस का मानना है कि आरोपी गिरोह की गतिविधियों और तकनीकी तरीके से एटीएम में की जाने वाली धोखाधड़ी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि गिरोह ने जयपुर के अलावा अन्य शहरों या राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया था या नहीं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह एटीएम मशीनों की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर नकदी निकालने की योजना बनाता था। पुलिस अब आरोपी से यह जानकारी जुटा रही है कि मशीन को हैंग करने के लिए किन तकनीकों या उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, गिरोह के अन्य सदस्य कौन-कौन हैं, चोरी की रकम का बंटवारा कैसे होता था और क्या किसी बैंकिंग या तकनीकी जानकारी रखने वाले व्यक्ति की भी इसमें भूमिका थी।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार एटीएम से जुड़ी तकनीकी धोखाधड़ी लगातार अधिक संगठित होती जा रही है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी मशीनों की कमजोरियों, नेटवर्क में बाधा उत्पन्न करने वाली तकनीकों या अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर बैंकिंग प्रणाली को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों को एटीएम सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपडेट करने, रियल-टाइम निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल अलर्ट प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से एटीएम ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी किसी अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा था या नहीं। यदि जांच में अन्य वारदातों में संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित मामलों में भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के आपसी संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
