हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस ने कथित “केमिकल मनी” रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने एक स्थानीय कारोबारी को नकदी दोगुनी करने का झांसा देकर ₹20 लाख की ठगी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹10 लाख नकद, नकली भारतीय और अमेरिकी मुद्रा, रसायन, ब्लैक पेपर तथा ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान टौरे ईएल हदजी महामाने उर्फ फोकू तामेन रोमुआल्ड उर्फ रोलिन (49) और तचुआनियू एडोल्फ उर्फ औरम (62) के रूप में हुई है। पहला आरोपी मूल रूप से माली के सेगू क्षेत्र का निवासी है, लेकिन उसके पास कैमरून का पासपोर्ट है और वह हैदराबाद के अत्तापुर में रह रहा था। दूसरा आरोपी कैमरून का नागरिक है, जो नई दिल्ली के वसंत कुंज में रहकर ऑनलाइन कारोबार करता था।
पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को हैदराबाद निवासी कृष्ण कांत वडलानी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों आरोपियों ने खुद को सफल कारोबारी बताते हुए दावा किया कि वे एक विशेष रासायनिक प्रक्रिया के जरिए किसी भी नकदी को दोगुना कर सकते हैं। भरोसा जीतने के लिए उन्होंने ब्लैक पेपर, रसायनों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर ऐसा प्रदर्शन किया, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि सादे कागज से असली मुद्रा तैयार की जा रही है।
इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर पीड़ित ने आरोपियों को ₹20 लाख सौंप दिए। आरोप है कि दोनों ने रकम को एक डिब्बे में पैक किया और कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें एक विशेष रसायन लाना होगा। उन्होंने पीड़ित को निर्देश दिया कि उनके लौटने तक डिब्बा न खोले। जब आरोपी वापस नहीं आए तो पीड़ित ने डिब्बा खोला और पाया कि नकदी की जगह उसमें सफेद कागज और रंगीन फोटोकॉपी शीट रखी हुई थीं। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए, विभिन्न सुरागों का विश्लेषण किया और क्षेत्र में गश्त के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने ठगी गई रकम में से ₹10 लाख नकद बरामद किए, साथ ही कई आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से इस धोखाधड़ी में किया जाता था।
बरामद सामान में नकली ₹500 के भारतीय नोट, नकली अमेरिकी डॉलर, एक्टिवेशन पाउडर, रासायनिक तरल पदार्थों की बोतलें तथा ब्लैक पेपर के बंडल शामिल हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन वस्तुओं का उपयोग कर आरोपी यह भ्रम पैदा करते थे कि साधारण कागज को रासायनिक प्रक्रिया से असली मुद्रा में बदला जा सकता है, जिससे लोग उनके झांसे में आ जाते थे।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विदेशी मोबाइल नंबरों से संभावित शिकारों को बार-बार फोन कर संपर्क करते थे। कई दौर की बातचीत के बाद उनका विश्वास जीतकर आमने-सामने मुलाकात तय की जाती थी, जहां नकदी दोगुनी करने का कथित प्रदर्शन कर ठगी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है और इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने यह भी बताया कि पहले आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ वर्ष 2025 में धोखाधड़ी, पासपोर्ट नियमों के उल्लंघन और विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा वर्ष 2022 में गुजरात में भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो चुका है। अब जांच एजेंसियां आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, संपर्कों और देश के विभिन्न राज्यों में उनकी गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की ‘मनी डबलिंग’ ठगी का शिकार और कितने लोग हुए हैं।
