लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वाहन फिटनेस प्रमाणन व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। राजधानी लखनऊ के बिजनौर स्थित एक निजी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) से बिना वाहन के परीक्षण केंद्र पहुंचे ही 10,056 वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। परिवहन विभाग की जांच में गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बाद संबंधित ATS का पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है। हालांकि जिन हजारों वाहनों को कथित रूप से फर्जी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए गए, उनके खिलाफ अब तक कोई व्यापक कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
मामला बिजनौर स्थित मेसर्स एफएस ट्रेडर्स द्वारा संचालित निजी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन से जुड़ा है। आरोप है कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच केवल तीन महीनों में 10,056 वाहनों की फिटनेस बिना वास्तविक परीक्षण किए ही प्रमाणित कर दी गई। नियमानुसार प्रत्येक व्यावसायिक वाहन की फिटनेस जांच के दौरान ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, हेडलाइट, प्रदूषण स्तर और अन्य सुरक्षा मानकों का परीक्षण अनिवार्य होता है। इसके बावजूद वाहन परीक्षण केंद्र पहुंचे बिना ही ऑनलाइन फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जाने से पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लखनऊ के दो वाहनों की फिटनेस बिना परीक्षण के ही जारी होने की शिकायत सामने आई। शिकायत मिलने के बाद परिवहन विभाग ने मामले की जांच शुरू की। बरेली परिक्षेत्र के उप परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने 23 अप्रैल को ATS का निरीक्षण किया। जांच के दौरान रिकॉर्ड और संचालन व्यवस्था में कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं, जिन्हें रिपोर्ट में दर्ज किया गया। इसके बाद संचालक महफूज अहमद को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया।
स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने पर परिवहन आयुक्त ने बिजनौर स्थित ATS का पंजीकरण प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। हालांकि विभागीय कार्रवाई के बावजूद सबसे बड़ा सवाल उन 10 हजार से अधिक वाहनों को लेकर है, जो कथित रूप से फर्जी फिटनेस प्रमाणपत्र के आधार पर प्रदेश की सड़कों पर संचालित हो रहे हैं। यदि इन वाहनों की वास्तविक तकनीकी जांच नहीं हुई है तो वे किसी भी समय सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
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प्रदेश में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले झांसी स्थित एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के खिलाफ भी गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई की गई थी। उस मामले में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। वहीं फिरोजाबाद स्थित एक अन्य ATS को भी अनियमितताओं के चलते बंद किया जा चुका है। राजस्थान में भी इसी तरह के मामलों के बाद कई ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों का संचालन बंद करना पड़ा था। लगातार सामने आ रहे मामलों ने निजी फिटनेस परीक्षण केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में लखनऊ समेत 27 जिलों में अब तक 34 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। राजधानी के बीकेटी क्षेत्र में दो ATS संचालित हैं। विभाग का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निरीक्षण प्रणाली को और सख्त बनाया जाएगा तथा तकनीकी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन फिटनेस प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। बिना परीक्षण के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी होना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ाता है। ऐसे में फर्जी प्रमाणपत्र प्राप्त सभी वाहनों की दोबारा तकनीकी जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पूरी फिटनेस प्रमाणन प्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराना आवश्यक माना जा रहा है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
