नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक कारोबारी से ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर ₹31.40 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को एक प्रतिष्ठित ट्रेडिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा और कम समय में अधिक रिटर्न का भरोसा दिलाया। शुरुआती दौर में प्लेटफॉर्म पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाकर विश्वास हासिल किया गया, जिसके बाद पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कई किश्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। जब उसने निवेश की गई राशि और कथित लाभ निकालने का प्रयास किया तो आरोपी बहाने बनाने लगे और बाद में पूरी तरह संपर्क समाप्त कर दिया। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरहित सिंह, जो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी और कारोबारी हैं, ने बताया कि जुलाई से सितंबर 2025 के बीच अज्ञात साइबर ठगों ने उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को एक प्रसिद्ध ट्रेडिंग कंपनी से जुड़ा प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें एक ऐसे ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया, जो देखने में किसी वैध ट्रेडिंग वेबसाइट जैसा प्रतीत होता था। आरोपियों ने दावा किया कि उनके माध्यम से निवेश करने पर कम समय में असाधारण लाभ कमाया जा सकता है।
जांच के अनुसार, शुरुआत में प्लेटफॉर्म पर निवेश की गई राशि पर लगातार लाभ का आंकड़ा दिखाया गया, जिससे शिकायतकर्ता का विश्वास बढ़ता गया। पीड़ित को यह भरोसा दिलाया गया कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है और वह किसी भी समय लाभ सहित पूरी राशि निकाल सकता है। इसी विश्वास के आधार पर उसने अलग-अलग तिथियों में कई किश्तों के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹31.40 लाख ट्रांसफर कर दिए। पुलिस के मुताबिक, सबसे अधिक राशि एक बैंक के दो खातों में भेजी गई, जबकि अन्य रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब पीड़ित ने अपने निवेश और कथित मुनाफे को निकालने का अनुरोध किया तो आरोपियों ने पहले तकनीकी कारणों और प्रक्रिया पूरी होने जैसे बहाने बनाए। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त समय मांगना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद आरोपियों के मोबाइल फोन बंद हो गए और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भी कोई जवाब नहीं मिला। तब पीड़ित को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है और उसने तत्काल साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामला दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस ने संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई, वे वास्तविक खाताधारकों के थे या साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल अकाउंट थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस धोखाधड़ी के पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है या नहीं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर वैध निवेश कंपनियों से मिलते-जुलते नाम, लोगो और वेबसाइट डिजाइन का उपयोग करते हैं ताकि लोगों को आसानी से विश्वास में लिया जा सके। शुरुआत में नकली लाभ दिखाकर निवेशकों को अधिक धन लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन जैसे ही बड़ी राशि जमा हो जाती है, निकासी पर विभिन्न बहाने बनाकर भुगतान रोक दिया जाता है और अंततः संपर्क समाप्त कर दिया जाता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, नियामकीय पंजीकरण और आधिकारिक वेबसाइट की स्वतंत्र रूप से जांच करना आवश्यक है। केवल सोशल मीडिया विज्ञापनों, मैसेजिंग ऐप या अनजान व्यक्तियों की सलाह पर निवेश नहीं करना चाहिए। यदि कोई संस्था कम समय में असामान्य या सुनिश्चित मुनाफे का दावा करे तो उसे संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का संदेह होते ही तुरंत संबंधित बैंक और पुलिस को सूचना दें, ताकि लेनदेन का पता लगाने और धनराशि को सुरक्षित करने की संभावना बढ़ाई जा सके।
