नई दिल्ली: अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई की “मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स” सूची में शामिल एक महिला को जमैका से गिरफ्तार कर अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है। उस पर कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार की राहत योजनाओं से ₹275 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने फर्जी कंपनियों, जाली कर दस्तावेजों, नकली बैंक रिकॉर्ड और गलत वित्तीय जानकारी के आधार पर विभिन्न संघीय राहत योजनाओं से धनराशि हासिल की। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में सामने आए सबसे बड़े कोविड राहत वित्तीय घोटालों में से एक है और करदाताओं के धन से संचालित योजनाओं के दुरुपयोग के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 41 वर्षीय एलेन एस्को (Elaine Escoe) के खिलाफ वर्ष 2025 में वायर फ्रॉड की साजिश, मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश, वायर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कई मामलों में अभियोग दायर किया गया था। मई 2025 में संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद वह अदालत में पेश नहीं हुई और कथित रूप से गिरफ्तारी से बचने के लिए जमैका फरार हो गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, एफबीआई द्वारा जुटाई गई खुफिया जानकारी के आधार पर जमैका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने आरोपी का पता लगाया। अधिकारियों का आरोप है कि वह “हार्ले न्यूमैन” नाम की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर जमैका में रह रही थी। बाद में एफबीआई, अमेरिकी मार्शल्स सर्विस, अमेरिकी विदेश विभाग की डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस, किंग्स्टन स्थित अमेरिकी दूतावास, जमैका कॉन्स्टेबुलरी फोर्स तथा जमैका फ्यूजिटिव अप्रिहेंशन टीम के संयुक्त अभियान के तहत उसे दक्षिण फ्लोरिडा प्रत्यर्पित किया गया।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, एलेन एस्को और उसके कथित सहयोगियों ने ₹275 करोड़ से अधिक की धनराशि प्राप्त करने के उद्देश्य से कोविड-19 राहत योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में फर्जी आवेदन दाखिल किए। इनमें पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम (PPP), रेस्तरां रिवाइटलाइजेशन फंड (RRF), शटरड वेन्यू ऑपरेटर्स ग्रांट (SVOG) और इकोनॉमिक इंजरी डिजास्टर लोन (EIDL) जैसी संघीय योजनाएं शामिल थीं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन आवेदनों में कंपनियों के अस्तित्व, कर्मचारियों की संख्या, राजस्व और व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में गलत जानकारी देकर सरकारी सहायता प्राप्त की गई।
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अधिकारियों के अनुसार, इस कथित साजिश में फर्जी आयकर रिटर्न, नकली बैंक स्टेटमेंट और अन्य जाली वित्तीय दस्तावेज तैयार कर आवेदन का समर्थन किया गया। जांच में यह भी आरोप है कि कुछ आवेदन सीधे आरोपियों के नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर दाखिल किए गए, जबकि कुछ अन्य लोगों के नाम पर आवेदन कराए गए और बदले में स्वीकृत धनराशि का 50 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि बाद में इस धनराशि को कई वित्तीय लेनदेन के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित कर उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने का प्रयास किया गया।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस गिरफ्तारी को एफबीआई की हाल ही में शुरू की गई “मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स” सूची के तहत बड़ी सफलता बताया है। उनके अनुसार, पिछले पांच सप्ताह में इस सूची के चौथे आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। जांच एजेंसियों ने यह भी बताया कि इस मामले में एलेन एस्को अंतिम आरोपी है जिसके खिलाफ अभियोग लंबित था। इससे पहले अन्य सह-आरोपियों को संघीय अदालत में दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें 42 महीने से 235 महीने तक के कारावास की सजा सुनाई गई है।
मामले की जांच एफबीआई के मियामी फील्ड ऑफिस द्वारा होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (HSI) और अन्य संघीय एजेंसियों के सहयोग से की जा रही है। अधिकारी वित्तीय लेनदेन की जांच, कथित धोखाधड़ी से अर्जित संपत्तियों की पहचान और सरकारी धन की वसूली पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड-19 राहत योजनाएं वास्तविक जरूरतमंद व्यवसायों की सहायता के लिए बनाई गई थीं और इनका दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जाली वित्तीय दस्तावेजों, फर्जी कंपनियों और मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से किए जाने वाले संगठित वित्तीय अपराध लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं। उनके अनुसार, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को दस्तावेजों के सत्यापन, डिजिटल निगरानी, उन्नत धोखाधड़ी पहचान प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत करना होगा, ताकि ऐसे सीमा-पार वित्तीय अपराधों का समय रहते पता लगाया जा सके और अवैध धन के प्रवाह को रोका जा सके।
