पटना: बिहार में मखाना कारोबार से जुड़े कथित ₹43.20 लाख की धोखाधड़ी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रमेश प्रसाद सिंह के बेटे और मखाना अमृत मंत्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमिताभ कुमार ने आरोप लगाया है कि लाखों रुपये की ठगी के बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उन्होंने अपनी विदेशी नागरिक पत्नी और ढाई वर्षीय बेटे को भारत से बाहर भेज दिया है। पीड़ित की शिकायत पर पटना के श्रीकृष्णापुरी थाने में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, कूटरचना और जान से मारने की धमकी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत के अनुसार, अमिताभ कुमार पूर्णिया के मरंगा औद्योगिक विकास केंद्र स्थित अपने मखाना प्रसंस्करण उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मखाने की खरीद करना चाहते थे। इसी दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और स्वयं को एक प्रतिष्ठित एग्रो कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया। आरोप है कि विश्वास में लेकर आरोपियों ने बड़े स्तर पर मखाना आपूर्ति का प्रस्ताव दिया।
पीड़ित का कहना है कि फरवरी 2026 में उन्होंने 6,000 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले मखाने की खरीद के लिए ₹43.20 लाख का ऑनलाइन भुगतान किया। भुगतान के बाद जो माल भेजा गया, वह न केवल तय मात्रा से कम था बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बेहद खराब थी। शिकायत के अनुसार, खरीदार ने माल की जांच के बाद उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और पूरी रकम वापस मांगी।
मामला बढ़ने पर मधुबनी में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में 17 मार्च को एक पंचायत आयोजित की गई। शिकायत के मुताबिक, इस बैठक में आरोपियों ने कथित रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए दो महीने के भीतर पूरी राशि लौटाने का लिखित आश्वासन दिया। हालांकि निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी न तो रकम लौटाई गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया।
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अमिताभ कुमार का आरोप है कि बाद में जब उन्होंने कानूनी नोटिस भेजा तो आरोपियों द्वारा दिया गया पता फर्जी निकला और नोटिस डाक विभाग से वापस लौट आया। इसके बाद उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार धमकी भरे फोन आने लगे। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने मधुबनी आने पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
पीड़ित का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उन्होंने अपनी विदेशी नागरिक पत्नी और ढाई वर्षीय बेटे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें भारत से बाहर भेजने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका बनी हुई है और इसी कारण उन्होंने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
श्रीकृष्णापुरी थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां ऑनलाइन भुगतान से जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल संचार, लेनदेन के दस्तावेज और कथित आरोपियों की पहचान से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित धोखाधड़ी किसी संगठित गिरोह द्वारा की गई या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित बैंक खातों, भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आरोपियों के ठिकानों का सत्यापन किया जाएगा। यदि जांच में फर्जी दस्तावेजों, झूठी पहचान या किसी बड़े नेटवर्क के प्रमाण मिलते हैं, तो मामले में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपियों की भूमिका तथा पूरे वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की जा रही है।
