पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मामलों के त्वरित निपटारे की पहल; औरंगाबाद और नागपुर में नामित अदालतों को सौंपी गई जिम्मेदारी

पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी पर सख्ती: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बनाए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट, अब तेजी से चलेगी सुनवाई

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मुंबई: सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन किया है, जो विशेष रूप से पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और महाराष्ट्र प्रिवेंशन ऑफ मालप्रैक्टिसेज एट यूनिवर्सिटी, बोर्ड एंड अदर स्पेसिफाइड एग्जामिनेशंस एक्ट, 1982 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी। इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों के मामलों का तेजी से निपटारा कर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करना है।

यह निर्णय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के 23 जुलाई 2026 के पत्र के बाद लिया गया। मंत्रालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को देखते हुए ऐसे मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए समर्पित अदालतें स्थापित करने का अनुरोध किया था। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारियों को विशेष अदालतों के रूप में नामित करने का आदेश जारी किया।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (निरीक्षण-1) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, औरंगाबाद न्यायिक जिले के लिए श्री एस.वी. पवार, 10वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट नामित किया गया है। वहीं, नागपुर न्यायिक जिले के लिए श्री गुलशन आर. कोल्टे, 7वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हाईकोर्ट ने औरंगाबाद और नागपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि वे इन अदालतों को विधिवत अधिसूचित करें, ताकि सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र के परीक्षा कदाचार रोकथाम कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई तत्काल शुरू की जा सके। साथ ही, इन अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले लंबित मामलों को भी तत्काल स्थानांतरित करने और अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

नए आदेश के तहत यदि इन जिलों में परीक्षा धोखाधड़ी, पेपर लीक, फर्जी अभ्यर्थियों, अनुचित साधनों के उपयोग या परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की आपराधिक अनियमितता से जुड़े मामले लंबित हैं, तो उन्हें अब इन विशेष अदालतों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे अलग-अलग अदालतों में लंबित मामलों के कारण होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है।

हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू किया, जिसके तहत पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-बिक्री, परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी और अन्य अनुचित गतिविधियों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना से जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को मामलों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिलेगी। इससे गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्यों की प्रस्तुति और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी भी कम हो सकती है। साथ ही, दोषियों को समयबद्ध तरीके से सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे भविष्य में परीक्षा संबंधी अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में सहायता मिलेगी।

हाईकोर्ट का यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। न्यायालय का मानना है कि परीक्षा से जुड़े अपराधों का त्वरित निपटारा न केवल कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगा, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों का सार्वजनिक भर्ती और शैक्षणिक परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत करेगा। अब इन विशेष अदालतों के संचालन के साथ यह देखा जाएगा कि परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का निस्तारण पहले की तुलना में कितनी तेजी से हो पाता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article