अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में एक निजी कंपनी के 33 वर्षीय मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) से मैट्रिमोनियल ऐप के जरिए संपर्क करने वाली महिला ने कथित तौर पर फर्जी क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजना का झांसा देकर ₹78.99 लाख की साइबर ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह संगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा है, जो पहले सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों का विश्वास जीतता है और फिर उन्हें फर्जी निवेश पोर्टलों में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करता है।
पुलिस के अनुसार पीड़ित हार्दिक चंद्रकांतभाई सोनी अहमदाबाद के वाडज क्षेत्र स्थित शायोना फेयरमोंट के निवासी हैं और एक निजी कंपनी में मुख्य वित्तीय अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में उन्होंने जीवनसाथी की तलाश के लिए ‘संगम’ मैट्रिमोनियल एप्लिकेशन की सदस्यता ली थी।
8 मई 2025 को उनकी मुलाकात ऐप पर खुद को हर्षिता गोंडाविथ बताने वाली महिला से हुई। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और कुछ समय बाद संवाद व्हाट्सएप पर स्थानांतरित हो गया। पुलिस के अनुसार महिला ने लगातार बातचीत कर पीड़ित का भरोसा जीता और खुद को सफल क्रिप्टो निवेशक बताते हुए दावा किया कि उसने क्रिप्टो निवेश से भारी कमाई कर जर्मनी के बर्लिन शहर के मध्य क्षेत्र में मकान खरीदा है। कथित तौर पर उसने संपत्ति के वीडियो भी साझा किए ताकि निवेश योजना विश्वसनीय लगे।
शिकायत के मुताबिक शुरुआत में हार्दिक ने निवेश करने से इनकार किया, लेकिन महिला के लगातार समझाने और भारी मुनाफे के दावों के बाद वह तैयार हो गए। इसके बाद महिला ने उन्हें m.bitcoin-on.com नामक एक कथित क्रिप्टो ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा, जहां उनसे नाम, ई-मेल, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारी देकर खाता बनवाया गया।
जांच में सामने आया कि वेबसाइट के कथित ग्राहक सहायता प्रतिनिधियों ने हार्दिक को अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करने के निर्देश दिए। प्रत्येक भुगतान के बाद उनसे लेनदेन की रसीद का स्क्रीनशॉट भेजने को कहा जाता था। इसके बाद वेबसाइट पर उनके ऑनलाइन खाते में USDT के रूप में निवेश दिखाई देता था, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि उनका पैसा वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी में लगाया जा रहा है।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
पुलिस के अनुसार 8 मई 2025 से 26 जनवरी 2026 के बीच हार्दिक ने ₹10,000 से लेकर ₹10 लाख से अधिक तक की कई किश्तों में कुल ₹78.99 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। वेबसाइट पर निवेश और कथित लाभ लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देता रहा, जिससे उन्हें और अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
समस्या तब शुरू हुई जब हार्दिक ने अपने निवेश और कथित मुनाफे की निकासी का प्रयास किया। आरोप है कि वेबसाइट संचालकों ने पहले टैक्स, फिर प्रोसेसिंग फीस, सत्यापन शुल्क और अन्य शुल्कों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की मांग शुरू कर दी। पीड़ित ने कई बार और रकम जमा की, लेकिन इसके बावजूद न तो मूल निवेश वापस मिला और न ही कथित लाभ की राशि जारी की गई।
अपने साथ धोखाधड़ी होने का एहसास होने पर हार्दिक ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। धनराशि वापस न मिलने पर उन्होंने अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई।
एफआईआर में मैट्रिमोनियल प्रोफाइल Harshitha-FS64217032 का उपयोग करने वाली महिला, उससे जुड़े व्हाट्सएप नंबर के उपयोगकर्ता, कथित फर्जी निवेश वेबसाइट के संचालकों, धन प्राप्त करने वाले बैंक खाताधारकों तथा जांच में सामने आने वाले अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेनदेन, मोबाइल संचार और वित्तीय ट्रेल की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
प्रमुख साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, मैट्रिमोनियल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए विश्वास कायम कर निवेश का लालच देना अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों की आम रणनीति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म, कंपनी और वेबसाइट की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए तथा अवास्तविक मुनाफे के वादों से हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
