मासिक रिटर्न और हीरे का लालच देकर निवेश कराने का आरोप; आर्थिक अपराध शाखा ने मनी ट्रेल की जांच शुरू की, पीड़ितों की संख्या बढ़ने की आशंका

₹47 करोड़ निवेश घोटाले का आरोप: नवी मुंबई की कंपनी पर 4,500 निवेशकों से कथित ठगी का मामला दर्ज, दो गिरफ्तार

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By Roopa
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नवी मुंबई (महाराष्ट्र): नवी मुंबई आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक कथित निवेश घोटाले का पर्दाफाश करते हुए OSSAM SWADESH LLP, उसके चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD), तीन मार्केटिंग निदेशकों, दो एजेंटों और अन्य प्रतिनिधियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी ने अनियमित जमा योजना (Unregulated Deposit Scheme) चलाकर लगभग 4,500 निवेशकों से करीब ₹47 करोड़ जुटाए। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, कंपनी नवी मुंबई के तुर्भे स्थित अक्षर बिजनेस पार्क से संचालित हो रही थी। आरोप है कि निवेशकों को निश्चित मासिक रिटर्न, प्रत्येक ₹1 लाख के निवेश पर एक हीरा और दो वर्ष बाद उस हीरे को ₹90,000 में वापस खरीदने का आश्वासन देकर निवेश के लिए आकर्षित किया जाता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह योजना जनवरी 2024 से संचालित किए जाने के आरोपों के केंद्र में है।

मामले की जांच तब शुरू हुई जब नवी मुंबई पुलिस की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) को कंपनी के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी बिना नियामकीय अनुमति के निवेश योजना चला रही है और निवेशकों से बड़ी रकम जुटा रही है। शिकायत मिलने के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने प्रारंभिक जांच शुरू की।

जांच के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी ने संभावित निवेशक बनकर कंपनी के कार्यालय का दौरा किया। पुलिस के अनुसार, वहां मौजूद एक मार्केटिंग एजेंट ने दावा किया कि योजना में लगभग 21,000 लोगों ने निवेश किया है। हालांकि अब तक की जांच में लगभग 4,500 निवेशकों की पहचान हुई है। पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और वास्तविक निवेशकों की संख्या का सत्यापन किया जा रहा है।

मामले में पुलिस ने कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुनील किसान पालवे (53) और एजेंट नवनाथ एकनाथ रेपाले (48) को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को बेलापुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से धन के प्रवाह की जांच कर रही है।

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जांच अधिकारियों के अनुसार, कई निवेशकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें योजना के तहत शुरुआती महीनों में कुछ भुगतान मिला, लेकिन बाद में मासिक रिटर्न पूरी तरह बंद हो गया। एक निवेशक ने बताया कि उसने ₹3 लाख का निवेश किया था और योजना पर भरोसा कर अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी निवेश के लिए प्रेरित किया। बाद में भुगतान रुक जाने से परिवार की बड़ी बचत कथित तौर पर इस योजना में फंस गई।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि निवेशकों को दिए गए हीरों की गुणवत्ता कथित रूप से वादे के अनुरूप नहीं थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या कंपनी ने निवेशकों को भ्रमित करने के लिए हीरों के मूल्य और गुणवत्ता के बारे में गलत जानकारी दी थी।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि निश्चित और असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं में निवेश से पहले संबंधित संस्था का नियामकीय पंजीकरण, वित्तीय वैधता और कारोबारी मॉडल की स्वतंत्र जांच करना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर शुरुआती निवेशकों को भुगतान कर विश्वास पैदा करते हैं और बाद में बड़ी संख्या में लोगों से धन जुटाकर भुगतान बंद कर देते हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते शिकायत दर्ज कराने और बैंकिंग लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराने से धन की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।

आर्थिक अपराध शाखा ने कहा है कि पूछताछ के दौरान धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) की विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, मामले में कई आरोपी, अनेक बैंक खाते और बड़ी संख्या में निवेशक शामिल हैं, इसलिए जांच में समय लग सकता है। पुलिस ने ऐसे सभी लोगों से आगे आने की अपील की है जिन्होंने इस या इसी प्रकार की किसी निवेश योजना में धन लगाया हो, ताकि मामले की व्यापक जांच कर आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए जा सकें और कथित रूप से ठगी गई राशि की अधिकतम संभव रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।

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