राजस्थान में 2026 में 12 जुलाई तक ₹387 करोड़ की साइबर ठगी दर्ज हुई, जिसमें जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।

राजस्थान में 2026 में ₹387 करोड़ की साइबर ठगी: जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

Team The420
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जयपुर (राजस्थान): राजस्थान में साइबर अपराध लगातार गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2026 में 12 जुलाई तक राज्य में साइबर ठग लोगों से करीब ₹387 करोड़ की धोखाधड़ी कर चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा और जोधपुर साइबर अपराध के प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं, जबकि निवेश से जुड़ी ऑनलाइन ठगी आर्थिक नुकसान का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है। पुलिस का दावा है कि बैंकों और विभिन्न साइबर एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के चलते ठगी की रकम फ्रीज करने और पीड़ितों को धन वापस दिलाने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में साइबर ठगी की राशि वर्ष 2023 में ₹354 करोड़ थी, जो 2024 में बढ़कर ₹795 करोड़ हो गई। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा ₹768 करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2026 में केवल 12 जुलाई तक ही ₹387 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी दर्ज की जा चुकी है। इसी अवधि में शिकायतों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023 में 77,880 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 1,27,782 तक पहुंच गईं। वहीं दर्ज एफआईआर की संख्या 237 से बढ़कर 492 हो गई।

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पुलिस के विश्लेषण के अनुसार, निवेश (इन्वेस्टमेंट) धोखाधड़ी सबसे बड़ा साइबर खतरा बनकर सामने आई है। वर्ष 2025 के आंकड़ों में कुल आर्थिक नुकसान का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा निवेश संबंधी ठगी से जुड़ा था, जबकि कुल शिकायतों में इसकी हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत रही। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट से कुल आर्थिक नुकसान का लगभग 8 प्रतिशत, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड से शिकायतों का 27 प्रतिशत लेकिन केवल 7 प्रतिशत आर्थिक नुकसान, जबकि सेक्सटॉर्शन से 18 प्रतिशत शिकायतें और लगभग 4 प्रतिशत आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया।

राष्ट्रीय साइबर हॉटस्पॉट मैप के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर से सटे जयपुर-अलवर-भरतपुर-दौसा कॉरिडोर में साइबर अपराधियों की गतिविधियां सबसे अधिक पाई गई हैं। राज्य में वर्ष 2024 के दौरान 64,424, वर्ष 2025 में 60,895 और वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 23,799 साइबर हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए।

राजस्थान पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में रकम फ्रीज करने की व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हुई है। वर्ष 2023 की तुलना में फ्रीज (लियन) की गई धनराशि में 339 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पीड़ितों को वापस लौटाई गई राशि लगभग 10 गुना बढ़कर ₹10 करोड़ से अधिक हो गई है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में साइबर क्राइम ब्रांच की स्थापना के बाद साइबर पुलिसिंग का तेजी से विस्तार किया है। वर्तमान में सभी 41 जिलों में 43 समर्पित साइबर पुलिस थाने संचालित हैं, जबकि छह नए थानों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 की 53 लाइनें चौबीसों घंटे संचालित हो रही हैं और इन्हें बढ़ाकर 60 करने की योजना है। जनवरी 2026 से ₹5 लाख या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों में ऑटोमेटेड जीरो ई-एफआईआर प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत अब तक 438 एफआईआर स्वतः दर्ज की जा चुकी हैं। इसके अलावा Cyber Shield, Vajra Prahar, Antivirus और Mule Hunter अभियानों के तहत इस वर्ष अब तक 9,744 फर्जी बैंक खाते, वेबसाइट और मोबाइल ऐप बंद या निष्क्रिय कराए गए हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और सोशल इंजीनियरिंग आधारित साइबर अपराध तेजी से अधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत होते जा रहे हैं। अपराधी फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, म्यूल बैंक खाते, सोशल मीडिया विज्ञापन और मोबाइल-आधारित धोखाधड़ी के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। उनका कहना है कि साइबर अपराध से प्रभावी मुकाबले के लिए केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि डिजिटल जागरूकता, त्वरित शिकायत, बैंकिंग नेटवर्क के बीच समन्वय, वित्तीय ट्रेल का तेजी से विश्लेषण और प्रशिक्षित जांच अधिकारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हालांकि, साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति आधिकारिक आंकड़ों से अधिक गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि कई शिकायतें अभी भी एफआईआर में परिवर्तित नहीं हो पातीं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने तथा अदालत में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जांच अधिकारियों के विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, निवेश प्रस्ताव या ऑनलाइन भुगतान अनुरोध पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि धनराशि को समय रहते फ्रीज करने की संभावना बढ़ सके।

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