पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ (IPO) में ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर 60 वर्षीय सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक (Deputy General Manager) से ₹86 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को स्टॉक मार्केट विश्लेषक बताते हुए पीड़ित से संपर्क किया और अपनी कथित निवेश कंपनी के जरिए शेयर बाजार तथा आईपीओ में निवेश पर भारी रिटर्न का दावा किया। विश्वास जीतने के लिए उसने कथित तौर पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी साझा किया। बाद में पीड़ित से एक निवेश ऐप डाउनलोड करवाकर अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपये के निवेश का झांसा देकर कुल ₹86 लाख ट्रांसफर करा लिए गए।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित एक ऑटोमोबाइल कंपनी में उप महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने इस संबंध में पिंपरी चिंचवड़ साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, 10 जून को पीड़ित के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक महिला का संदेश आया। उसने स्वयं को अनुभवी स्टॉक मार्केट विश्लेषक बताते हुए दावा किया कि उसकी कंपनी के माध्यम से शेयरों और आईपीओ में निवेश करने पर कम समय में आकर्षक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। भरोसा पैदा करने के लिए महिला ने कंपनी के SEBI में पंजीकृत होने का दावा किया और कथित तौर पर पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति भी भेजी।
इसके बाद आरोपी ने विस्तृत निवेश योजना साझा कर पीड़ित का विश्वास हासिल किया। कुछ दिनों बाद उन्हें एक निवेश एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा गया। पुलिस का कहना है कि ऐप डाउनलोड करने के बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में निवेश के नाम पर धनराशि जमा करानी शुरू कर दी।
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जांच में सामने आया है कि 17 जून से 14 जुलाई के बीच पीड़ित ने कई किश्तों में कुल ₹86 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए। निवेश ऐप में कथित तौर पर लाभ और बढ़ती हुई निवेश राशि दिखाई जाती रही, जिससे पीड़ित को विश्वास होता रहा कि उनका पैसा सुरक्षित है और अच्छा रिटर्न मिल रहा है।
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने अपने निवेश की राशि निकालने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, निकासी की अनुमति नहीं दी गई और जब उन्होंने महिला से संपर्क करने की कोशिश की तो उसका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं और उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क किया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पीड़ित द्वारा भेजी गई रकम देश के विभिन्न राज्यों में स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इनमें असम के धेमाजी जिले के सिलापाथर, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा और उत्तर प्रदेश के बिजनौर सहित अन्य स्थानों के बैंक खाते शामिल हैं। पुलिस अब धन के पूरे प्रवाह, लाभार्थियों और बैंक खातों के संचालन से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल उपकरणों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी निवेश से जुड़े मामलों में लोगों का भरोसा जीतने के लिए फर्जी SEBI प्रमाणपत्र, नकली निवेश ऐप, बनावटी लाभ के स्क्रीनशॉट और ऑनलाइन डैशबोर्ड का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की वैधता केवल उसके भेजे गए दस्तावेजों के आधार पर नहीं माननी चाहिए, बल्कि SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि सोशल मीडिया पर मिले निवेश प्रस्तावों, गारंटीड रिटर्न के दावों और अनधिकृत ऐप्स से सावधान रहें। यदि निवेश की गई राशि निकालने में बाधा आए या बार-बार अतिरिक्त भुगतान की मांग की जाए, तो तुरंत लेनदेन रोककर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से धन की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।
