वाराणसी (उत्तर प्रदेश): वाराणसी पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो लोगों को नकली सोना और नोटों की गड्डियां दिखाकर साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहा था। बड़ागांव थाना क्षेत्र के भरतपुर इलाके में सक्रिय इस गिरोह के एक सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि उसके दो साथी मौके से फरार हो गए। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
मामले का खुलासा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच के दौरान हुआ। भरतपुर क्षेत्र में साइबर कैफे चलाने वाले रिकी रोशन ने शिकायत की थी कि 17 जुलाई को उनके बैंक खाते में ₹15,300 का संदिग्ध लेनदेन हुआ था। इसके बाद बैंक ने सुरक्षा कारणों से उनके खाते को होल्ड कर दिया था और राशि को फ्रीज कर दिया गया था।
जांच में सामने आया कि एक युवक ने साइबर कैफे संचालक को ऑनलाइन क्यूआर कोड भुगतान दिखाकर नकद रुपये लिए थे। बाद में उसी लेनदेन को लेकर बैंक की ओर से कार्रवाई की गई। इस घटना के कुछ दिन बाद वही युवक दोबारा साइबर कैफे पहुंचा और ऑनलाइन भुगतान करने के बदले नकदी मांगने लगा।
साइबर कैफे संचालक ने युवक को पहचान लिया और तुरंत शोर मचा दिया। आसपास मौजूद लोगों ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया, जबकि उसके साथ आए दो अन्य युवक भागने में सफल रहे। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी की पहचान जौनपुर जिले के रामपुर थाना क्षेत्र के गोपालापुर निवासी 40 वर्षीय आलोक सिंह के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह अपने साथियों हेमंत सिंह और सतीश सिंह के साथ मिलकर लोगों को ऑनलाइन माध्यम से नकली सोना और नकदी की गड्डियां दिखाकर ठगी करता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि 17 जुलाई को ही आरोपियों ने एक व्यक्ति को ऑनलाइन सोना दिखाकर करीब ₹85,000 की ठगी की थी। ठगी से हासिल रकम को नकदी में बदलने के लिए आरोपी साइबर कैफे पहुंचे थे। इसी दौरान साइबर कैफे संचालक की सतर्कता के कारण पूरे गिरोह का खुलासा हो गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों को लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या डिजिटल माध्यमों पर सोने और बड़ी मात्रा में नकदी मिलने का दावा करते थे। इसके बाद पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाते थे या नकद राशि हासिल कर लेते थे। जांच एजेंसियां अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी लोगों की लालच और भरोसे का फायदा उठाते हैं। नकली निवेश, सस्ते सोने, पुराने नोटों या अचानक मिलने वाले आर्थिक लाभ का झांसा देकर लोगों को जल्द निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन ऑफर या लेनदेन से पहले उसकी वास्तविकता की जांच करना बेहद जरूरी है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब पारंपरिक ठगी के तरीकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़कर नए तरीके अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी पहचान, ऑनलाइन भुगतान माध्यम और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में तत्काल शिकायत, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना और बैंकिंग चैनलों को तुरंत सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। वहीं फरार आरोपी हेमंत सिंह और सतीश सिंह की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन सौदे, निवेश या आर्थिक लाभ के लालच में बिना सत्यापन पैसे ट्रांसफर न करें।
