देहरादून: उत्तराखंड राज्य साइबर क्राइम सेल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वॉयस क्लोनिंग तकनीक के जरिए बढ़ रही साइबर ठगी को लेकर लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। वहीं, Future Crime Research Foundation (FCRF) ने भी नागरिकों को AI आधारित सोशल इंजीनियरिंग हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि साइबर ठग अब AI-संचालित वॉयस मॉड्यूलेशन टूल का इस्तेमाल कर परिजनों, दोस्तों और परिचितों की आवाज़ की लगभग हूबहू नकल कर रहे हैं तथा व्हाट्सएप वॉयस मैसेज भेजकर आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए तत्काल पैसे मांग रहे हैं।
साइबर सेल के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसे मामलों की जानकारी मिली है, जिनमें पीड़ितों को व्हाट्सएप पर ऐसे वॉयस नोट प्राप्त हुए जो उनके किसी रिश्तेदार या परिचित की आवाज़ जैसे प्रतीत हुए। इन संदेशों में दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने, कानूनी परेशानी या अन्य आपात स्थिति का हवाला देकर तत्काल बैंक खाते या UPI आईडी पर पैसे भेजने का अनुरोध किया गया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि साइबर अपराधी आधुनिक AI वॉयस मॉड्यूलेशन तकनीक का उपयोग कर कुछ सेकंड के ऑडियो नमूने से किसी व्यक्ति की आवाज़ की विश्वसनीय नकल तैयार कर लेते हैं। यही कारण है कि केवल आवाज़ सुनकर किसी भी वित्तीय अनुरोध को सही मान लेना गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वॉयस मैसेज या कॉल के आधार पर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर न करें। यदि कोई परिचित या रिश्तेदार आपात स्थिति का हवाला देकर धन मांगता है, तो पहले उसके पुराने और सत्यापित मोबाइल नंबर पर सीधे कॉल कर उसकी पहचान की पुष्टि करें। केवल व्हाट्सएप वॉयस नोट या नए नंबर से आई कॉल पर भरोसा न करें।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि किसी भी अज्ञात बैंक खाते या UPI आईडी पर केवल वॉयस संदेश के आधार पर भुगतान न करें। यदि संदेश संदिग्ध लगे या उसमें जल्दबाजी का दबाव बनाया जा रहा हो, तो उसे संभावित साइबर धोखाधड़ी मानते हुए पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें।
Future Crime Research Foundation (FCRF) ने कहा कि AI वॉयस क्लोनिंग सोशल इंजीनियरिंग का तेजी से उभरता हुआ स्वरूप है, जिसमें अपराधी तकनीक और मानवीय भावनाओं दोनों का फायदा उठाते हैं। संस्था ने सलाह दी कि परिवार के सदस्य पहले से किसी निजी प्रश्न, कोड वर्ड या वैकल्पिक सत्यापन प्रक्रिया पर सहमति बना लें, ताकि आपातकालीन वित्तीय अनुरोध की वास्तविकता तुरंत परखी जा सके। FCRF ने यह भी कहा कि केवल आवाज़ के आधार पर किसी भी प्रकार का वित्तीय लेनदेन नहीं करना चाहिए और प्रत्येक अनुरोध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आवश्यक है।
साइबर सेल ने लोगों से कहा है कि यदि उन्हें AI से तैयार किया गया कोई संदिग्ध वॉयस मैसेज या कॉल प्राप्त होता है, तो उसकी जानकारी तुरंत निकटतम पुलिस थाने या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर दें। साथ ही, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें, ताकि समय रहते धन की रिकवरी और आरोपियों की पहचान की संभावना बढ़ाई जा सके।
