प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति का बकाया भुगतान समय पर नहीं किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हापुड़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का बैंक खाता कुर्क करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों द्वारा आपूर्ति करने वाली एजेंसियों का वैध भुगतान लंबे समय तक रोके रखना स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने अन्य जिलों के कई सीएमओ को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि उनके विरुद्ध भी इसी प्रकार की कार्रवाई क्यों न की जाए।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने वसीम मेडिकल एजेंसी की याचिका पर की। याचिका में कहा गया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों पर दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति के बदले भुगतान लंबे समय से लंबित है। एजेंसी का दावा है कि भुगतान न मिलने के कारण उसे गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि बरेली, सहारनपुर, बिजनौर, आगरा, गाजियाबाद, कासगंज, हरदोई, हापुड़, रामपुर, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, जौनपुर और बदायूं सहित कई जिलों में चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति की गई थी, लेकिन निर्धारित समय पर पूरा भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आवश्यक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों का भुगतान लंबित रखना प्रशासनिक जवाबदेही के अनुरूप नहीं है।
सुनवाई के दौरान बरेली, सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, रामपुर, अलीगढ़, आगरा और जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की ओर से बताया गया कि संबंधित बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया है। अदालत ने भुगतान किए जाने का संज्ञान लिया, लेकिन जिन जिलों में अभी भी राशि लंबित है, वहां के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।
रिकॉर्ड के अनुसार, जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 31 मार्च को ₹95,960 का भुगतान कर दिया था। वहीं हापुड़ के मामले में अदालत को बताया गया कि पांच लंबित बिलों में से केवल ₹99,994 का एक बिल ही चुकाया गया, जबकि चार बिलों की राशि अब भी बकाया है। इन लंबित बिलों में ₹61,920, ₹30,272, ₹46,784 और ₹36,808 शामिल हैं। इस प्रकार कुल ₹1,75,784 का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।
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हापुड़ की ओर से अदालत को बताया गया कि बजट की कमी और कुछ तकनीकी कारणों के चलते समय पर भुगतान नहीं हो सका। हालांकि अदालत इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई और बकाया भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए सीएमओ के बैंक खाते को कुर्क करने का आदेश दे दिया। अदालत ने संकेत दिया कि सरकारी विभाग वित्तीय या प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर वैध देनदारियों के भुगतान से बच नहीं सकते।
खंडपीठ ने कासगंज, हरदोई, मुजफ्फरनगर, जौनपुर और बदायूं के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भी 22 जुलाई को दोपहर दो बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि यदि उनके यहां भी भुगतान लंबित है तो उनके बैंक खातों को कुर्क करने जैसी कार्रवाई क्यों न की जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सरकारी संस्थानों द्वारा समय पर भुगतान न करने से आवश्यक सेवाओं से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति बाधित होने का असर सीधे मरीजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे अनुबंध और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करें।
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई निर्धारित करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों और भुगतान की स्थिति के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि भविष्य में भी बकाया भुगतान और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आगे भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
