निजामाबाद (तेलंगाना): तेलंगाना के निजामाबाद जिले में देवक्कापेट वन क्षेत्र में तेंदुए की संदिग्ध मौत के बाद अवैध शिकार के खिलाफ चलाए गए संयुक्त अभियान में पुलिस और वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार कर जंगल से नौ अवैध देशी बंदूकें बरामद की हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि आरोपी वन्यजीवों के अवैध शिकार के लिए इन हथियारों का इस्तेमाल करते थे। अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में तेंदुओं की संदिग्ध मौत की घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई थी और अब यह जांच भी की जा रही है कि गिरफ्तार आरोपियों का उन घटनाओं से कोई संबंध है या नहीं।
पुलिस के अनुसार, देवक्कापेट वन क्षेत्र में एक तेंदुए की संदिग्ध मौत के बाद वन विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान शुरू किया था। खुफिया सूचना के आधार पर सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) और भीमगल थाना पुलिस की टीमों ने 16 जुलाई की तड़के संयुक्त कार्रवाई की। अभियान के दौरान देवक्कापेट गांव के बाहरी इलाके में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों को रोका गया और तलाशी के दौरान जंगल में छिपाकर रखी गई नौ देशी बंदूकें बरामद की गईं।
जांच में सामने आया कि बरामद सभी हथियार बिना किसी वैध लाइसेंस के रखे गए थे। पुलिस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धारा 5 सहपठित धारा 25(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध हथियार कहां से लाए गए, उनका निर्माण किसने किया और उनका उपयोग किन-किन गतिविधियों में किया जाता था।
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प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को संकेत मिले हैं कि आरोपी देवक्कापेट और आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों का अवैध शिकार करते थे। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि क्या यह समूह किसी बड़े संगठित शिकार गिरोह का हिस्सा है या फिर स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र रूप से अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। पुलिस का मानना है कि यदि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान हो जाती है तो वन्यजीव अपराधों के कई मामलों का खुलासा हो सकता है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तेंदुए की मौत की जांच अभी भी जारी है और फिलहाल किसी भी आरोपी की उस घटना में प्रत्यक्ष संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फोरेंसिक साक्ष्यों, बैलिस्टिक जांच, घटनास्थल से मिले भौतिक प्रमाणों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। वन विभाग भी स्वतंत्र रूप से वन्यजीव अपराधों से जुड़े तथ्यों का परीक्षण कर रहा है।
पुलिस का कहना है कि जंगलों में अवैध हथियारों के इस्तेमाल और शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। संवेदनशील वन क्षेत्रों में संयुक्त अभियान जारी रहेगा तथा स्थानीय ग्रामीणों और वन सुरक्षा समितियों की भी सहायता ली जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी व्यक्ति के पास अवैध हथियार होने, वन्यजीवों के शिकार या जंगलों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस या वन विभाग को सूचित करें।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, संगठित वन्यजीव अपराधों में अवैध हथियारों, स्थानीय नेटवर्क और तस्करी चैनलों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल हथियारों की बरामदगी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय लेनदेन, मोबाइल संचार, डिजिटल साक्ष्यों और वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की समानांतर जांच भी आवश्यक होती है। उनका मानना है कि पुलिस, वन विभाग और फोरेंसिक एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
