नागपुर (महाराष्ट्र): कथित ₹1.14 करोड़ के निवेश धोखाधड़ी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने निवेशकों के हितों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (MPID) अधिनियम के तहत कार्रवाई में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को न्यायालय में जमा ₹62 लाख की राशि की कुर्की (Attachment) की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कानून में उपलब्ध प्रावधानों का समयबद्ध क्रियान्वयन आवश्यक है।
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह 23 जुलाई तक राशि की कुर्की के लिए जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करें। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया गया कि प्रस्ताव प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए, ताकि प्रभावित निवेशकों को राहत दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
मामला कारोबारी राजेश ताराचंद बंसोड से जुड़ा है, जिस पर फॉर्च्यून फिशरीज, विजन फिशरीज और फॉर्च्यून एक्वा के नाम से कथित निवेश योजना संचालित करने का आरोप है। जांच के अनुसार, आरोपी ने केज कल्चर (Cage Culture) तकनीक आधारित मत्स्य पालन परियोजना में निवेश करने पर आकर्षक और उच्च रिटर्न का वादा कर लोगों से धन जुटाया। आरोप है कि इस योजना के तहत लगभग ₹1.14 करोड़ एकत्र किए गए, लेकिन निवेशकों को न तो मूलधन लौटाया गया और न ही वादा किया गया लाभ दिया गया।
बताया गया कि निवेशकों की शिकायतों के बाद वर्ष 2021 में ध्रुव रघुबंश कुमार की शिकायत पर नागपुर के सीताबर्डी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग), 409 (लोक सेवक या एजेंट द्वारा आपराधिक न्यासभंग) और 420 (धोखाधड़ी) के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम तथा महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (MPID) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
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मामले में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की कार्यवाही के दौरान उच्चतम न्यायालय ने आरोपी को राहत देते हुए शर्त रखी थी कि वह नागपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में ₹62 लाख जमा करेगा। न्यायालय के 24 फरवरी 2025 के आदेश के अनुपालन में आरोपी ने यह राशि जमा कर दी थी। हालांकि, निवेशकों का आरोप था कि अदालत में राशि जमा होने के बावजूद राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों ने MPID अधिनियम के तहत कुर्की की प्रक्रिया शुरू नहीं की।
इसके बाद प्रभावित निवेशकों के एक समूह ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और आरोप लगाया कि निवेशकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए वैधानिक प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अदालत में राशि जमा होने के बावजूद संबंधित वैधानिक प्रक्रिया समय पर आगे नहीं बढ़ाई गई, जिससे निवेशकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि MPID अधिनियम का उद्देश्य निवेशकों की जमा पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और धोखाधड़ी के मामलों में संपत्तियों की शीघ्र कुर्की कर पीड़ितों को राहत दिलाना है। इसलिए संबंधित अधिकारियों का दायित्व है कि वे कानून के प्रावधानों के अनुरूप बिना अनावश्यक विलंब के कार्रवाई करें।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, ऊंचे और सुनिश्चित रिटर्न का लालच देकर चलाई जाने वाली निवेश योजनाएं वित्तीय धोखाधड़ी का सामान्य माध्यम बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले कंपनी का नियामकीय पंजीकरण, व्यवसाय मॉडल, वित्तीय दस्तावेज और वैधानिक अनुमोदनों का स्वतंत्र सत्यापन करना चाहिए। यदि कोई संस्था अवास्तविक रिटर्न का दावा करे या पारदर्शी जानकारी उपलब्ध न कराए, तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल संबंधित नियामक अथवा कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए।
