नोएडा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पुलिस ने ऑपरेशन साइ वज्र के तहत नोएडा में संचालित दो कथित फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, एक कॉल सेंटर से लोगों को एयरलाइंस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर और दूसरे से बीमा पॉलिसी मैच्योर कराने, रिफंड, कम ब्याज पर ऋण तथा क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने के नाम पर कथित साइबर ठगी की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में लगभग 500 लोगों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-2 स्थित एक अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी के दौरान मोहित कुमार और आदेश यादव को गिरफ्तार किया गया, जबकि गिरोह का कथित सरगना सोनू कुमार फरार हो गया। कार्रवाई के दौरान पांच स्मार्टफोन, पांच कीपैड मोबाइल, पांच सिम कार्ड, एक पेन ड्राइव, दो डेस्कटॉप कंप्यूटर तथा कथित फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपी विभिन्न रोजगार वेबसाइटों से नौकरी तलाशने वाले अभ्यर्थियों का डेटा प्राप्त कर उन्हें एयरलाइंस में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे।
जांच के अनुसार, इच्छुक अभ्यर्थियों को कथित फर्जी जॉब ऑफर लेटर, आवेदन पत्र और अन्य दस्तावेज भेजे जाते थे। इसके बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर धनराशि जमा कराई जाती थी। पुलिस का आरोप है कि रकम प्राप्त होने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर और सिम कार्ड बदल देते थे, जिससे पीड़ित दोबारा संपर्क न कर सकें।
पुलिस ने बताया कि बरामद पेन ड्राइव और कंप्यूटर से एयरलाइंस के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेज, फॉर्म, इनवॉयस और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं। सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर डिजिटल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि कथित नेटवर्क के आकार, पीड़ितों की संख्या और वित्तीय लेनदेन का पूरा विवरण सामने आ सके।
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एक अन्य कार्रवाई में सेक्टर-6 स्थित दूसरे कॉल सेंटर से तनुज कुमार गोयल और पंकज को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से एक लैपटॉप, तीन कीपैड मोबाइल, एक स्मार्टफोन, 17 एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित रूप से लैप्स बीमा पॉलिसी का पैसा दिलाने, पॉलिसी मैच्योर कराने, अधिक बीमा दावा दिलाने, कम ब्याज पर ऋण और क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से धन ठगते थे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी कथित ठगी की रकम परिचितों के बैंक खातों में मंगवाते थे और उन खातों से जुड़े एटीएम कार्ड अपने पास रखते थे। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने का भी प्रयास किया जाता था। प्रारंभिक जांच में एक पीड़ित से लगभग ₹3.13 लाख की कथित ठगी का मामला भी सामने आया है, जबकि विभिन्न राज्यों से इस गिरोह के विरुद्ध साइबर शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है।
Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी कॉल सेंटर आधारित साइबर धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर रोजगार, बैंकिंग और बीमा सेवाओं का झांसा देकर लोगों का विश्वास जीतते हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल फोरेंसिक, बैंकिंग रिकॉर्ड, कॉल डेटा, भुगतान ट्रेल और इलेक्ट्रॉनिक संचार का विश्लेषण पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और अन्य सहयोगियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गिरफ्तारी या पुलिस के आरोप मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अभियोजन पक्ष को न्यायालय में डिजिटल, दस्तावेजी और अन्य स्वीकार्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होंगे, जबकि सभी आरोपियों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। जब्त मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान अन्य पीड़ित, अतिरिक्त आरोपी या व्यापक साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा होता है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
