फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली लेटरहेड और मुहर बनाकर युवाओं को स्थायी नौकरी का झांसा; संगठित गिरोह की आशंका में जांच तेज

PMC में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹45 लाख की ठगी, निगम स्कूल का चपरासी गिरफ्तार

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By Roopa
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पुणे (महाराष्ट्र): पुणे नगर निगम (PMC) में स्थायी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से करीब ₹45 लाख की ठगी करने के आरोप में पुलिस ने नगर निगम संचालित स्कूल के एक चपरासी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली सरकारी लेटरहेड, मुहर और वरिष्ठ अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर तैयार कर युवाओं को सरकारी नौकरी का भरोसा दिलाया और उनसे लाखों रुपये वसूल लिए। मामले में एक प्रमुख मंदिर ट्रस्ट से जुड़े व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

यह मामला मार्च 2022 से जुलाई 2026 के बीच सामने आए कथित भर्ती घोटाले से जुड़ा है। शिकायत पुणे नगर निगम की अधिकारी शलाका विनायक धोंडे ने शिवाजीनगर पुलिस थाने में दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने निगम कार्यालयों और अन्य स्थानों पर कई युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली।

पुलिस ने इस मामले में शिवानंद बालासाहेब पाटिल, जो पुणे नगर निगम संचालित एक स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत है, को कोथरुड क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को सरकारी भर्ती का झांसा देकर अपने जाल में फंसा रहे थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पुणे नगर निगम के नाम से फर्जी लेटरहेड तैयार किए, नकली सरकारी मुहरें बनाईं और वरिष्ठ अधिकारियों के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल करते हुए नियुक्ति पत्र तैयार किए। इन दस्तावेजों को इस तरह बनाया गया था कि वे पहली नजर में पूरी तरह असली प्रतीत हों। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर युवाओं का विश्वास जीतकर उनसे नकद और चेक के माध्यम से रकम ली गई।

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शिकायत के अनुसार, कई अभ्यर्थियों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही उन्हें नौकरी पर तैनात कर दिया जाएगा। हालांकि समय बीतने के बाद भी किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं मिली। बाद में जांच करने पर पता चला कि नगर निगम की ओर से ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया संचालित ही नहीं की गई थी, जिसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करने और उनका उपयोग करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि इस भर्ती घोटाले में कितने लोग शामिल थे और कितने अभ्यर्थी इसके शिकार बने।

एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक शोधकर्ता के अनुसार, सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर नकली नियुक्ति पत्र, फर्जी सरकारी वेबसाइट, जाली दस्तावेज और प्रभावशाली लोगों के नाम का इस्तेमाल कर विश्वास हासिल करते हैं। किसी भी सरकारी भर्ती से संबंधित सूचना केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत भर्ती एजेंसी से ही सत्यापित करनी चाहिए। नियुक्ति के बदले धनराशि मांगना या निजी माध्यम से भुगतान कराने का दावा गंभीर धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।

पुलिस फिलहाल आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह मामला स्वारगेट पुलिस थाने में पहले दर्ज इसी तरह की शिकायत से जुड़ा हुआ है।

जांच एजेंसियां सभी संभावित कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में शामिल अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ठगी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने का प्रयास किया जाएगा।

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